* उत्तराखंडी संस्कृति की झलक के साथ दिया नारी सशक्तीकरण का संदेश, मर्यादा, भाईचारे और अच्छाई की जीत का कराया अहसास
बरेली। भारतीय संस्कृति में रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि जीवन के आदर्शों और नैतिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। देशभर में रामलीला के मंचनों के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के आदर्शों पर चलने, सत्य का साथ देने और पारिवारिक रिश्तों की गरिमा बनाए रखने का संदेश दिया जाता है। लेकिन इस बार बरेली में पर्वतीय समाज की रामलीला अपने अनूठे प्रयोग को लेकर विशेष चर्चा में रही। उत्तराखंडी संस्कृति और परंपराओं की अनूठी छटा बिखेरने वाली इस रामलीला में बेटियों ने प्रमुख पात्रों की भूमिका निभाकर इतिहास रच दिया और यह संदेश दिया कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं।
बेटियों ने निभाए प्रमुख किरदार, बदली परंपरा की तस्वीर
आमतौर पर रामलीला के मंचन में प्रमुख महिला और पुरुष पात्रों की भूमिकाएं भी पुरुष कलाकार ही निभाते हैं। लेकिन पर्वतीय समाज की रामलीला ने इस परंपरा से आगे बढ़कर एक नई मिसाल पेश की। यहां बेटियों ने रामलीला के प्रमुख किरदारों को जीवंत कर अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और अभिनय क्षमता का परिचय दिया।
यह पहल केवल मंचन तक सीमित नहीं रही, बल्कि समाज को नारी सशक्तीकरण का सार्थक संदेश भी दे गई। बेटियों की इस भागीदारी ने साबित किया कि अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर वे संस्कृति, कला और सामाजिक गतिविधियों के हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना सकती हैं।
उत्तराखंडी संस्कृति और राम के आदर्शों का संगम
पर्वतीय समाज की रामलीला में उत्तराखंडी शैली की झलक ने आयोजन को विशिष्ट पहचान दी। स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं के साथ भगवान श्रीराम के आदर्शों का संगम दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।
रामलीला के माध्यम से समाज को संदेश दिया गया कि जीवन में मर्यादा, सत्य, कर्तव्य और सदाचार का विशेष महत्व है। भगवान श्रीराम का जीवन हमें कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। वहीं, भरत का चरित्र भाई के प्रति त्याग, प्रेम और समर्पण की ऐसी मिसाल प्रस्तुत करता है, जो आज भी पारिवारिक रिश्तों को मजबूत बनाने की सीख देता है।
संस्कृति संरक्षण के साथ सामाजिक बदलाव की पहल
पर्वतीय समाज की इस रामलीला ने यह भी स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ-साथ समय के अनुरूप सकारात्मक बदलाव अपनाना भी जरूरी है। परंपराओं का सम्मान करते हुए बेटियों को प्रमुख भूमिकाएं देना समाज में समान अवसर और उनकी प्रतिभा पर विश्वास का प्रतीक है।
इस तरह रामलीला का मंचन धार्मिक आस्था और मनोरंजन से आगे बढ़कर सामाजिक जागरूकता का माध्यम बन गया। आयोजन ने एक ओर उत्तराखंडी संस्कृति को मंच प्रदान किया, वहीं दूसरी ओर बेटियों की क्षमता और उनके आत्मविश्वास को नई पहचान दी।
आयोजन की सफलता में इनका रहा विशेष योगदान
पर्वतीय समाज की रामलीला के सफल आयोजन में अध्यक्ष देवेंद्र सिंह दियोलिया, महासचिव देवेंद्र सिंह बिष्ट, लोक गायक पूरन सिंह दानू और मीडिया प्रभारी देवेंद्र रावत का विशेष सहयोग रहा। आयोजकों के सामूहिक प्रयासों से रामलीला ने सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ समाज को एक सकारात्मक संदेश देने का कार्य किया।
कुल मिलाकर, पर्वतीय समाज की रामलीला ने यह संदेश दिया कि संस्कृति की जड़ें परंपराओं में होती हैं, लेकिन उसकी मजबूती नई पीढ़ी की भागीदारी और समान अवसरों से बढ़ती है। भगवान श्रीराम के आदर्शों, भरत के भाई-प्रेम और बेटियों की प्रतिभा का यह संगम बरेली में एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया।
पर्वतीय समाज की रामलीला ने रचा इतिहास, बेटियों ने निभाए रामलीला के प्रमुख किरदार
