नाले चोक, सड़कें डूबीं, पॉश इलाके भी हुए जलमग्न, ट्रैक्टर पर सवार होकर निकले अफसर

बरेली। इंद्रदेव ने आसमान से कृपा थोड़ी ज्यादा क्या वरसा दी, स्मार्ट सिटी होने पर इतराने वाले बरेली में समुंदर से हालात्त बने नजर आए। निचली मोहल्ले क्या, पॉश इलाके भी टापू बन गए। रामपुर गार्डन, सिविल लाइंस, राधेश्याम एक्लेव, राजेन्द्रनगर, पटेल नगर, डीटीपुरम, सुरेश शमां नगर, महानगर, ग्रीन पार्क, पवन विहार जैसी चमचमाती कालोनियों में भी वारिश का पानी घरों में घुस गया। रेजिडेंसी गार्डन में तो कोठियों के अंदर फंसे लोगों को निकलने के लिए ट्रेक्टर ट्रालियों का सहारा लेना पड़ा। हायतौवा और हंगामों के बीच सिकलापुर में लोग झटपट नाव बनाकर उसकी सवारी करते दिखे। मुसीबत में फंसे लोग प्रशासन, नगर निगम, फायर बिग्रेड, पाबर कारपोरेशन के दफ्तरों में फोन कर मदद की गुहार लगाते रहे। नगरायुक्त डॉ. संजीव मौर्या वारिश के बीच ही मैदान में मोर्चा संभालते दिखे। निगम की टीमें जलभराव में फंसे इलाकों से पंपिंग सेटों के जरिए पानी निकालने में जुटी रही मगर लगातार बारिश का दौर चलते रहने से कई-कई घंटे राहत नहीं मिली। नगर निगम की टीमें दिन-में रात जलनिकासी में जुटीं रही मगर लगातार बारिश होने से राहत की मुहिम में आफत आती रही। भारी बारिश का दौर रविवार दोपहर से शुरू हुआ था। इसके बाद पूरी रात झामाज्ञाम बारिश और सोमवार को भी रुक रुककर मूसलाधार बारिश ने बरेली में पूर जनजीवन अस्तकास्त कर डाला। शायद ही ऐसा कोई कालोनी और मोहल्ला बचा हो, जहा जलप्लायन जैसे हालात न बने हो। निचले इलाकों में चार से पाच फीट पानी जमा हो गया। घरों, दुकानों और अस्पतालों में पानी घुसने से सब कुछ अस्त-व्यस्त हो गया। सबसे बुरा हाल रेजिडेसी गार्डन कॉलोनी का रहा, जहां हालात बहुत खराब हो गए। कारे डूब गई। मौके पर पहुंचे नगर आयुक्त ने तुरंत राहत कार्य शुरू कराए। पानी निकासी के लिए पंप सेट और सेक्शन टैंक लगवाए गए, जो शान तक पानी नहीं निकाल सके। लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नगर निगम व निजी ट्रैक्टरों का सहारा लेना पड़ा। राजेंद्र नगर की कहानी भी कुछ ऐसी ही दिखी। सड़को पर कई-कई फुट पानी जमा हो गया। सड़को के साथ साथ दुकानों, बड़े बड़े शोरूमों, अस्पतालों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पानी घुस जाने से भारी आर्थिक नुकसान हुआ। सतीपुर में कब्रिस्तान की दीवार ढह गई। राधेश्याम इक्लेव में चार से पांच फीट, जबकि पान विहार, सजय नगर, ठेलाधीर, मुशीनगर, कुर्मांचल नगर और कैलाशपुर में कमर तक पानी भर गया। सुभाष नगर, हाजियापुर, किला और शहामतगंज जैसे निचले इलाकों में नाले और सड़के एक समान हो गए। नगर आयुक्त ने अफसरो के साथ प्रभावित इलाको का दौरा कर पप सेट लगवाए ओर नालों पर अवैध अतिक्रमण ध्वस्त कराया। पुराने शहर के जगतपुर, आकाशपुरग, बिहारीपुर सौदागरान, दरगाह आला हजरत मोड़, मलूकपुर बजरिया, बमनपुरी समेत कई प्रमुख इलाकों में सह‌के पानी में पूरी तरह खूब गई। सड़को पर घुटनों तक पानी भरने से राहगीरो, वाहन चालकों और रथानीय दुकानदारों को ढेरों दिक्कतों का सामना करना पड़ा। गंदा पानी दुकान व घरों के अंदर घुस जाने से सामान खराब होने की स्थिति बन गई। पानी में गड्ढे न दिखने के कारण कई बाइक सवार वाहन चालक फिसलकर गिर गए और गाड़ियां बंद होने से लोग धक्का लगाने को मजबूर दिखे। बारिश के कारण शहर के निचले क्षेत्रों जैसे सुभाष नगर, हजियापुर, जोगीनवादा, किला, शहामतगंज, पवन विहार में जलभराव की गंभीर समस्या खड़ी हो गई। सड़कों पर कई फीट पानी भरने से खुले नालों और सड़क का अंतर पूरी तरह समाप्त हो गया, जिससे राहगीरों के उफनको नालों में गिरने का खतरा पैदा हो गया। खाटू श्याम मंदिर के सामने दो लोग नाले में गिर गए। इसके अलावा तमाग इलाकों में जलभराव के बीच दर्जनों दोपहिया और चारपहिया वाहन रास्ते में ही बंद हो गए और लोगों को पैदल गंदे पानी से गुजरना पड़ा। उधर, मलूकपुर बजरिया में अधूरी सड़क के चलते लोग परेशान रहे।।

बरेली से कपिल यादव

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