बरेली। शारदीय नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन महानवमी का पर्व आज श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन मां दुर्गा के नौवें और अंतिम स्वरूप को समर्पित है। मान्यता है कि आज के दिन मां की पूजा करने से नवरात्रि की नौ दिनों की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। मां सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान करने वाली हैं। शास्त्रों में आठ प्रकार की सिद्धियां बताई गई हैं – अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व। कहा जाता है कि भगवान शिव ने भी मां सिद्धिदात्री की कृपा से ही सभी सिद्धियों को प्राप्त किया था और उनका आधा शरीर देवी का हो गया था, जिसके कारण वे अर्धनारीश्वर कहलाए। मां सिद्धिदात्री कमल के आसन पर विराजमान हैं, कई जगहों पर वह सिंह पर भी सवार दिखाई देती हैं। इनकी चार भुजाएं हैं। चारों भुजाओं में क्रमशः गदा, चक्र, शंख और कमल का फूल सुशोभित है। माता का यह स्वरूप अत्यंत सौम्य और मोहक है। महानवमी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मां की तस्वीर या मूर्ति को गंगाजल से शुद्ध करें। मां को लाल रंग के फूल, रोली, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें। मां सिद्धिदात्री को तिल, नारियल, खीर और हलवा-पूरी का भोग अति प्रिय है। आज के दिन मोर हरा या आसमानी रंग के वस्त्र प हनना अत्यंत शुभ माना जाता है।
— बरेली से कपिल यादव
