डॉ. सैयद एहतेशाम उल हुदा की हुई दस्तारबंदी: ख़ानदानी सूफ़ी सिलसिले की गद्दी की सौंपी गई जिम्मेदारी

बरेली।हज़रत सैयद ऐनुल हुदा साहब क़िबला (रहमतुल्लाहि अलैह) के चालीसवें के अवसर पर बुधवार, 4 नवंबर 2026 को पुराना शहर बरेली स्थित साजन पैलेस शादी हॉल में भव्य धार्मिक एवं रूहानी आयोजन हुआ। इस अवसर पर उनके साहबज़ादे डॉ. सैयद एहतेशाम उल हुदा की दस्तारबंदी की रस्म देशभर से आए प्रमुख दरगाहों और ख़ानक़ाहों के सज्जादानशीनों, उलमा-ए-किराम और मशायिख की मौजूदगी में अदा की गई। इसके साथ ही उन्हें अपने बुज़ुर्गों के ख़ानदानी सूफ़ी सिलसिले की रूहानी विरासत और गद्दी की जिम्मेदारी सौंपी गई। कार्यक्रम का संचालन बरेली कॉलेज के अरबी एवं फ़ारसी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर महमूद साहब ने किया।

डॉ. सैयद एहतेशाम उल हुदा का संबंध महाराष्ट्र के परभणी शरीफ़ स्थित मशहूर ख़ानक़ाह-ए-तुराबुल हक़ से है। उनके वालिद मरहूम हज़रत सैयद ऐनुल हुदा साहब के परदादा तथा डॉ. एहतेशाम उल हुदा के लकड़दादा हज़रत सैयद शाह फ़रज़न्द अली उर्फ़ तुराबुल हक़ शाह बाबा (रहमतुल्लाहि अलैह) महाराष्ट्र के प्रसिद्ध सूफ़ी बुज़ुर्ग थे, जिन्हें अकीदतमंदों के बीच महाराष्ट्र के ग़रीब नवाज़ के नाम से जाना जाता है। परभणी शरीफ़ में उनकी विशाल दरगाह और ख़ानक़ाह स्थित है। हज़रत तुराबुल हक़ शाह बाबा के ख़ानदानी शिजरे से जुड़ी सूफ़ी परंपरा पीढ़ियों से आगे बढ़ती रही है। इसी रूहानी विरासत और सिलसिले की गद्दी की जिम्मेदारी अब मरहूम हज़रत सैयद ऐनुल हुदा साहब के बाद उनके साहबज़ादे डॉ. एहतेशाम उल हुदा को सौंपी गई है।

इस अवसर पर देश की प्रमुख दरगाहों और ख़ानक़ाहों से जुड़े सज्जादानशीनों ने शिरकत की। इनमें सय्यद फ़ारदीन अली चिश्ती (सज्जादानशीन, सुल्तानुल हिंद हज़रत ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ की दरगाह, अजमेर शरीफ़), सय्यद असलम मियाँ वामिक़ी (सज्जादानशीन, ख़ानक़ाह-ए-वामिक़िया, बरेली), हज़रत अल्लामा मौलाना अल्हाज नूर मियाँ क़ादरी (सज्जादानशीन, ख़ानक़ाह-ए-अल्लाह हू मियाँ, पीलीभीत), हज़रत सूफ़ी अबरार मियाँ क़ादरी (सज्जादानशीन, ख़ानक़ाह-ए-क़ादरिया अजज़िया, नानकार, रामपुर), सय्यद अफ़ाक़ शाह उर्फ़ फ़हद मियाँ निज़ामी (सज्जादानशीन, ख़ानक़ाह शाह जमाल), ख़्वाजा अनवर फ़रीदी (सज्जादानशीन, ख़ानक़ाह बाबा फ़रीदी, रजाकपुर, अमरोहा), फ़ैज़ान निज़ामी, जावेद निज़ामी,रिज़वान निज़ामी, वसीम मियाँ साबरी नुसरी (ख़ादिम दरगाह नासरी नौमहला, बरेली), सूफी शाने अली, सूफ़ी फ़रहत हुसैन लियाक़ती जहाँगीरी सज्जादा नशीं हसनी अज़ीज़ी बदायूँनी तथा सूफ़ी ज़ीशान अनवरी (सज्जादानशीन, ख़ानक़ाह-ए-अनवारुल औलिया, रामपुर) प्रमुख रूप से शामिल रहे।

इसके अतिरिक्त जनाब शब्बू मियाँ (सज्जादानशीन, ख़ानक़ाह-ए-वसीलिया) और दरगाह शाहदाना वली के मुतवल्ली बब्बू मियाँ साहब सहित विभिन्न दरगाहों और ख़ानक़ाहों के जिम्मेदारान ने भी शिरकत की। दरगाह आला हज़रत से जुड़े नुसरत मियाँ उर्फ़ नुसरत अली खान साहब भी विशेष रूप से मौजूद रहे। देश की कई अन्य प्रमुख दरगाहों और ख़ानक़ाहों के सज्जादानशीन, उलमा एवं मशायिख किसी कारणवश स्वयं उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को इस रस्म-ए-दस्तारबंदी में शामिल होने के लिए भेजा।

इस आयोजन की विशेष बात यह रही कि हज़रत सैयद शाह फ़रज़न्द अली उर्फ़ तुराबुल हक़ शाह बाबा के ख़ानदानी शिजरे से जुड़े देशभर के लोग बड़ी संख्या में बरेली पहुंचे। बलिया, सिकंदरपुर, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों से आए ख़ानदान के लोगों ने अपने मरहूम बुज़ुर्ग हज़रत सैयद ऐनुल हुदा साहब के चालीसवें और डॉ. एहतेशाम उल हुदा की दस्तारबंदी में शिरकत की। इनमें सैयद अनवार साहब, सैयद उमर साहब, सैयद फिरोज़ साहब तथा ख़ानदान के अन्य जिम्मेदार और बुज़ुर्ग शामिल रहे।

राजनीतिक क्षेत्र से भी बड़ी संख्या में प्रमुख हस्तियां कार्यक्रम में पहुंचीं। बरेली के सांसद छत्रपाल गंगवार, भाजपा महानगर अध्यक्ष अधीर सक्सेना, उत्तर प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष एवं ब्रज क्षेत्र के पूर्व अध्यक्ष दुर्गविजय शाक्य, एससी-एसटी आयोग के सदस्य ओमेश कटेरिया सहित विभिन्न विधायकगण एवं उनके प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके अलावा एडीजी बरेली रमित शर्मा तथा पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी शिरकत की। भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भी इस अवसर पर मौजूद रहे।

डॉ. सैयद एहतेशाम उल हुदा भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, उत्तर प्रदेश राज्य हज समिति के निवर्तमान सदस्य तथा भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के सूफ़ी संवाद महाअभियान के प्रदेश प्रभारी हैं। उनकी दस्तारबंदी के अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों की बड़ी भागीदारी देखने को मिली।

शहर के चिकित्सा जगत की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही। बरेली के 50 से अधिक प्रमुख चिकित्सक और विभिन्न बड़े अस्पतालों के संचालक कार्यक्रम में पहुंचे। इनमें डॉ. मोहम्मद फ़ाज़िल (निदेशक, आला हज़रत हॉस्पिटल), भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं ख़ुशलोक हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. विनोद पागरानी, डॉ. फ़हद बिन हमीद, डॉ. आफ़ताब (नेत्र रोग विशेषज्ञ) तथा वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. नसीरुद्दीन अंसारी सहित शहर के अनेक प्रतिष्ठित चिकित्सक शामिल रहे।

सामाजिक एवं गणमान्य नागरिकों में पम्मी वारसी,आरिम अली चिश्ती सईद खान (शाहजहाँपुर), प्रोफेसर योगेश शर्मा, प्रोफेसर प्रगेश शर्मा, मौलाना मंसूर खान उर्फ़ टिंकू और गुफ़रान खान साहब प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इसके अतिरिक्त बरेली शहर के मशहूर अधिवक्ता शारिक खान एडवोकेट, नवाबगंज सहित शहर के अनेक वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। शहर के प्रमुख व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और गणमान्य नागरिक भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

मरहूम हज़रत सैयद ऐनुल हुदा साहब स्वयं उर्दू एवं हिंदी के शायर, कवि और साहित्यकार थे। यही वजह रही कि साहित्य जगत से जुड़े अनेक लोगों ने भी पहुंचकर उन्हें ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया। कार्यक्रम में लगभग 500 से अधिक लोगों ने शिरकत की।

कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संपन्न कराने में मिराज उर्फ़ पम्मी भाई, शुजा क़ादरी, सलमान उर्फ़ मन्नू, हिफ़ज़ान, समद और फ़ैज़ान सहित अन्य सहयोगियों की अहम भूमिका रही। इन सभी ने मेहमानों के स्वागत, व्यवस्थाओं और आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में सक्रिय सहयोग किया।

धार्मिक रस्मों के अंतर्गत महफ़िल-ए-मिलाद, फ़ातिहा ख़्वानी, तबर्रुक की तक़सीम और खाने का एहतमाम किया गया। कार्यक्रम के अंत में मुल्क में अमन-ओ-अमान, आपसी भाईचारे, हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई एकता, सामाजिक सौहार्द और देश की तरक्की के लिए विशेष दुआ की गई। सय्यद फ़ारदीन अली चिश्ती साहब ने प्रधानमंत्री जनाब नरेंद्र मोदी की लंबी उम्र और सेहत के लिए भी दुआ की तथा मुल्क की खुशहाली और तरक्की की कामना की। सय्यद असलम मियाँ वामिक़ी साहब ने देश में आपसी सौहार्द, अमन और भाईचारे की मजबूती के लिए दुआ की।

अपने ख़िताब में डॉ. सैयद एहतेशाम उल हुदा ने कहा कि हिंदुस्तान विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और परंपराओं के अलग-अलग रंगों के फूलों का खूबसूरत गुलदस्ता है। हमें इन सभी फूलों को एकता की माला में पिरोकर रखना है। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सहित सभी धर्मों के लोगों को मिलकर देश की तरक्की के लिए काम करना होगा। उन्होंने कहा कि अनेकता में एकता ही हिंदुस्तान की असली पहचान है और जब सभी समुदाय मिलकर आगे बढ़ेंगे, तभी हमारा देश दोबारा विश्वगुरु बनने के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगा। कार्यक्रम का समापन मुल्क में अमन, भाईचारे, आपसी सौहार्द और विश्व शांति की दुआ के साथ हुआ।

— बरेली से तकी रज़ा

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