जैविक खेती के साथ तकनीक का प्रयोग करें किसान! निदेशक एनपी सिंह

पिंडरा- निदेशक एवं अपर चीनी आयुक्त एनपी सिंह ने कहाकि बढ़ती जनसख्या व घटते कृषि क्षेत्र एव प्राकृतिक संसाधनों के दशा को देखते हुए उत्पादन में बृद्धि करके ही खाद्यन्न सुरक्षा बरकरार रखा जा सकता है। नही तो आने वाले दिनों में लोग अन्न के लिए तरस जाएंगे।
उक्त बातें बुधवार को बरजी गांव स्थित एक विद्यालय में आयोजित गन्ना मेला व संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि कही।उन्होंने कहा कि उर्वरकों के असन्तुलित प्रयोग और कार्बनिक खादों के नगण्य प्रयोग के कारण उवर्रक शक्ति और फसल उत्पादन में कमी आने लगी है। इसलिये किसानों को मृदा स्वास्थ्य सम्बर्धन एव फसल उत्पाद के लिए सर्वोत्तम उर्वरक प्रबंधन तकनीकी व जैविक खेती को अपनाकर उर्वरकों का कम प्रयोग कर उत्पादन क्षमता बढ़ाने की अपील की।
वही सहा0 निदेशक मनोज कुमार श्रीवास्तव ने गन्ने में लगने वाले विभिन्न रोगों एवं कीटो के पहचान के बाबत विस्तृत जानकारी दी। गन्ना शोध परिषद शाहजहाँपुर के वरिष्ठ बैज्ञानिक डॉ एस पी सिंह ने गन्ने के विभिन्न स्वीकृत जातियों व गन्ने के बैज्ञानिक खेती के बाबत किसानों को जानकारी दी। बीएचयू के प्रो डॉ आर के सिंह ने गन्ने की शरद कालीन बुआई और सहफसली खेती व सिंचाई की जानकारी दी। बीज उत्पादन अधिकारी डॉ सुधीर गुप्ता ने ट्रेंच बिधि से गन्ना की बुआई एवं गन्ने की पेड़ी प्रबन्ध के बाबत जानकारी दी।
इस दौरान जिला गन्ना अधिकारी श्रीमती मंजू सिंह,इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ आर के श्रीवास्तव, कृभको के क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ जसबीर सिंह ने भी किसानों को योजनाओं के बाबत जानकारी दी। इस दौरान प्रदर्शनी के माध्यम से गन्ने की खेती को भी किसानों के बीच मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया। इस दौरान क्षेत्र के सैकड़ो किसान उपस्थित रहे।

*गरखड़ा में भी हुई संगोष्ठी*
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के तहत गरखड़ा (मुलका) गांव में भी कृषि गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें किसानों को शिड ड्रिल द्वारा कतारबद्ध बुआई, खरपतवार नाशक दवाओं के प्रयोग,उन्नत किस्म के बीज लगाने समय समय पर पानी का प्रयोग समेत कृषि से संबंधित अनेक जानकारी किसानों को दी गई।इस दौरान एडीओ कृषि प्रेमशंकर सिंह,प्रगतिशील किसान सच्चिदानंद गिरी,विजय उपाध्याय, मुसाफिर सिंह समेत अनेक किसान रहे।

रिपोर्ट-:संजय गुप्ता फूलपुर

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