बरेली। जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के महीने में आस्ताना-ए-आलिया मोहम्मदिया (दरगाह वली मियां) में शुक्रवार को बाद नमाज-ए-इशा तरहई नातिया मुशायरे का आयोजन किया गया। मुशायरे में शहर के अलावा लखनऊ, प्रयागराज, शाहजहांपुर, मुरादाबाद, रामपुर और दिल्ली समेत कई शहरों से आए जायरीन और शायरों ने शिरकत की। दरगाह प्रवक्ता सय्यद नाजिम अली चांद ने बताया कि कार्यक्रम का आगाज कारी गुलाम यासीन ने कलाम-ए-पाक की तिलावत से किया। इसके बाद दरगाह वली मियां के सज्जादानशीन अनवर मियां ने ऐसा भी हो जाए करम मेरे सरकार ये किसी भी दिन,दीद भी हो तो दीदा-ए-बेदार ये किसी भी दिन पढ़कर मुशायरे की शुरुआत की। मुशायरे की निजामत कर रहे हिलाल बदायूंनी ने मिल जाए मेरी फिक्र को मेयार ये किसी भी दिन, लिखूं सनाए सय्यदे अबरार ये किसी भी दिन। पढ़कर शोअरा को दावत-ए-सुखन दी और मुशायरे को आगे बढ़ाया। इसके बाद मोइन नवाबगंजवी, सरफराज अहमद फराज के कलाम पर महफिल में खूब वाहवाही हुई। समर बदायूंनी, गुल मोहम्मद कादरी, मुफ्ती शौकीन रामपुरी, हयात बरेलवी और सरवत परवेज सहसवानी ने भी अपने-अपने कलाम पेश किए। मुफ्ती सगीर अख्तर, शाद पीलीभीती, दुलारे फारूकी, डॉ.नईम कासगंजवी समेत अन्य शोअरा-ए-किराम ने भी नातिया कलाम पेश कर महफिल को रूहानी रंग दिया। मुशायरे के समापन पर सलात-ओ-सलाम पेश किया गया। इसके बाद दरगाह वली मियां के सज्जादानशीन ने दुआ कराई। मुल्क में अमन, सलामती, भाईचारे और खुशहाली की दुआ की गई। कार्यक्रम में इफ्तिखार हुसैन, हाफिज फाजिल, फैजी उल हक, इलियास, हाफिज जानिसार, कैफी उल्लाह, सैयद मुस्तजाब अली, शाकिर, सुलेमान, सैयद कौसर, अब्दुल कादिर, अखलाक अहमद, शमसुद्दीन, वारिस उल्लाह समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।।
बरेली से कपिल यादव
