राजस्थान/बाड़मेर- दो दिन पहले बाड़मेर जिले के दौरे पर आए प्रभारी सचिव रोहित गुप्ता पुनः रविवार को विकास योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा करेंगे l इस दौरान समस्त विभागीय अधिकारियों को आवश्यक सूचनाओं के साथ बैठक में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं l अतिरिक्त जिला कलक्टर राजेंद्र सिंह चांदावत ने बताया कि प्रभारी सचिव रोहित गुप्ता की अध्यक्षता में रविवार को दोपहर तीन बजे कलेक्ट्रेड कांफ्रेंस हॉल में आयोजित होने वाली समीक्षा बैठक में फ्लैगशिप योजनाओं,बजट घोषणाओं, राजस्थान संपर्क, जिला स्तरीय सतर्कता समिति एवं जन सुनवाई में परिवाद निस्तारण की स्थिति, जलदाय विभाग,डिस्कॉम, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज,चिकित्सा, शिक्षा,रसद,राजस्व विभाग, भू-आवंटन, लम्बित राजस्व वाद समेत विभिन्न विभागों की विकास योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति रिपोर्ट के साथ ही मूलभूत समस्याओं का समाधान करने की समीक्षा की जाएगी l
राज्य के मुखिया भजन लाल शर्मा और मुख्य सचिव राज्य सरकार द्वारा समय- समय पर सचिवालय में अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त हिदायतें देते है। लेकिन वातानुकूलित कमरों में बैठकर जो दिशा- निर्देशों को जारी किए जाते हैं उन्हें धरातल पर लागू करने में अधिकांश अधिकारियों को जैसे अपनी तनख्वाह काटकर जनता जनार्दन को देने जैसा महसूस करते हैं। अगर सरकार का भय हमेशा आमजन को ही रहता है तो फिर सरकारी मशीनरी को क्यों नहीं इसके कारण ही मौजूदा हालात में बड़े बड़े नेताओं का जमावड़ा बाड़मेर जैसलमेर और बालोतरा जिलों में अक्सर होता रहता है चाहे कोई शिविरों के बहाने या फिर कोई और कार्यक्रम उद्देश्य सिर्फ एक ही भीड़ इकट्ठा करना लोगों की धरातल पर।
सेवानिवृत्त इन्जीनियर बी एल शर्मा ने कहा कि लोगों की मूलभूत समस्याओं का समाधान प्रशासनिक क्षमताओं में पहली प्राथमिकता होना चाहिए और जल प्रबंधन की विफलताओं के लिए पूर्ववर्ती और वर्तमान सरकार को कोसने से क्या फायदा, मरण तो आखिर जनता जनार्दन का ही है।
बाड़मेर में नहरी जल संकट के स्थायी समाधान के लिए राजनैतिक इच्छाशक्ति के साथ-साथ प्रशासनिक दूरदर्शिता की आवश्यकता है। इस बात में जनता की उस गहरी हताशा और दर्द की झलक है जो बुनियादी सुविधाओं, विशेषकर पानी जैसी जीवन रक्षक चीज़ की कमी से पैदा होती है, यह बिल्कुल सच है कि सरकारों और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहता है, लेकिन इसका सीधा और सबसे गंभीर असर शहर में आम नागरिकों के जीवन पर पड़ता है।
मूलभूत समस्याओं से केवल ग्रामीण इलाके के लोग नहीं बल्कि शहरी क्षेत्रों के लोग भी जूझ रहे हैं। जिस तेजी से शहरों के आसपास आबादी बढ़ी है, उस लिहाज से मूलभूत सुविधाओं का विस्तार नहीं किया जा सका है। किसी भी जिम्मेदार अधिकारी का भी इन पर कोई ध्यान नहीं होता है। गावों और शहरों में आजकल एक बात चर्चा का कारण है कि सरकारी कार्यालयों के अधिकारियों को अपनी जेब कटवाना नहीं बल्कि जेब का भार बढ़ाने पर विश्वास रखते हैं। ओर इनकी कृपालु दृष्टि से ही गावों और शहर में लगातार मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं करने की दिनों दिन बाढ़ आ रही है।
बाड़मेर जैसलमेर जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं का अग्रेजी शासन की गुलामी से छुटकारा पाने के साथ ही नव राजस्थान राज्य का निर्माण हुआ और तब से ही हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में जगह जगह पर सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों के अनुसार मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होने से आमजन भारी अभावों में जीवन जी रहे है। हर बार चुनावों में मतदाताओं द्वारा इस उम्मीद से वोट डालते हैं कि उनकी समस्याओं का समाधान इस बार जरूर हो जाएगा, लेकिन चुनाव दर चुनाव बीतते गए, उनकी मूलभूत समस्याएं ज्यों की त्यों बरकरार रहीं। अब तो राज्य और देश में भी डबल इंजन की सरकार बन गई है अब तो पिछड़े हुए बाड़मेर जिले में लम्बी दूरी की रेलगाड़ियों की मांग, उत्तरलाई हवाई अड्डे से आम आदमी के लिए सस्ती हवाई सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ ही बाड़मेर नगर परिषद की सीमा क्षेत्र में शहरीकरण का विस्तार, पुलिस थाने रिको एरिया में दानजी की होदी क्षेत्र में नयी पुलिस चौकी, बरसात आने के साथ ही लोगों को सबसे ज्यादा बारिश के दौरान शहर की निचली बस्तियाँ में जलभराव की चिंता रहती है और वो भी महिनों तक वहाँ के लोगों का शहर से जुडा़व कट जाता है और बिजली पानी और सड़क सहित कई अन्य समस्याओं का समाधान तो फिर रामभरोसे कहें तो फिर कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।
— राजस्थान से राजूचारण
