जलवायु परिवर्तन महिलाओं को अलग तरह से प्रभावित करता है
जलवायु परिवर्तन का असर हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं पड़ता। खासकर महिलाओं के लिए इसके प्रभाव कई बार और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। पानी की कमी, बढ़ती गर्मी, हीटवेव और बदलते मौसम का असर उनके स्वास्थ्य, काम और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। ऐसे समय में सैनिटरी पैड जैसी जरूरी चीजों तक आसान और सम्मानजनक पहुँच भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाती है।
इसी सोच के साथ हिबा ग्रीन फाउंडेशन ने ‘प्रोजेक्ट सखी’ की शुरुआत की है। इसका उद्देश्य जरूरतमंद महिलाओं और लड़कियों तक सैनिटरी पैड पहुँचाना और मासिक धर्म स्वच्छता को स्वास्थ्य, गरिमा और सामाजिक जागरूकता से जोड़ना है।
अब तक ‘प्रोजेक्ट सखी’ के माध्यम से हम लगभग 500 महिलाओं तक सैनिटरी पैड पहुँचा चुके हैं। यह केवल पैड वितरण की पहल नहीं है। हमारा प्रयास है कि मासिक धर्म को लेकर होने वाली झिझक और असुविधा को कम किया जाए और महिलाओं को उनकी बुनियादी जरूरतों के लिए सम्मानजनक सहयोग मिले।
हम मानते हैं कि जलवायु नियंत्रण सिर्फ पेड़ लगाने, कार्बन उत्सर्जन कम करने या पर्यावरण बचाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जलवायु परिवर्तन से जुड़ी समस्याएँ समाज के अलग-अलग वर्गों को अलग तरह से प्रभावित करती हैं। इसलिए एक बेहतर और टिकाऊ भविष्य बनाने की कोशिश में स्वास्थ्य, स्वच्छता, समान अवसर और गरिमा जैसे मुद्दों को भी शामिल करना जरूरी है।
‘प्रोजेक्ट सखी’ इसी सोच का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम है। हम चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस पहल से जुड़ें और जरूरतमंद महिलाओं तक यह सहायता पहुँचाने में सहयोग करें।
महिलाएँ सिर्फ जलवायु परिवर्तन से प्रभावित होने वाला वर्ग नहीं हैं। वे परिवारों, समुदायों और भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
‘प्रोजेक्ट सखी’ का संदेश सरल है-जलवायु कार्रवाई ऐसी हो, जिसमें विकास के साथ इंसान और उसकी गरिमा भी केंद्र में रहे।
