आंवला, बरेली। जनपद के थाना भमोरा के रामबेटी हत्याकांड में करीब 26 महीने बाद खुलासा कर एसआईटी ने उनके बेटे को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। पुलिस का कहना है कि मौखिक, भौतिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। इस मामले में नामजद समेत छह संदिग्धों का पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया गया लेकिन उन्हें क्लीनचिट मिल गई थी। बता दें कि छह अगस्त 2024 की रात थाना भमोरा के गांव कुड्ढा मे 55 वर्षीय रामबेटी की धारदार हथियार से हमला करके हत्या कर दी गई थी। इस मामले में रामबेटी के बेटे विजेंद्र ने परिवार के ही नत्थू सिंह, सर्वेश सिंह, सुरेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह और छोटे सिंह के खिलाफ कोटे की रंजिश में हत्या करने की रिपोर्ट दर्ज कराई। भमोरा पुलिस ने विवेचना शुरू की और नामजद समेत अन्य कई संदिग्धों से पूछताछ की लेकिन हत्या का खुलासा नहीं हो सका। कई विवेचक बदल गए लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। इस पर एसएसपी अनुराग आर्य ने हत्याकांड के खुलासे के लिए एसआईटी का गठन किया और इंस्पेक्टर संजय धीर को विवेचना सौंप दी। इंस्पेक्टर संजय धीर ने इस मामले में आरोपी और वादी पक्ष का पॉलीग्राफ टेस्ट कराया। इसमें पांचों नामजद नत्थू सिंह, सर्वेश सिंह, सुरेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह व छोटे सिंह और एक अन्य व्यक्ति वीरेश ने सहमति देकर पॉलीग्राफ टेस्ट पूरा कराया, जिसमें उन्हें क्लीनचिट मिल गई। इसके बाद पुलिस ने मुकदमे के वादी विजेंद्र, उसके भाई महेंद्र, भाभी मीरा, पिता अमर सिंह और उनके पक्ष के ही बुधपाल का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की बात कही लेकिन सभी ने मना कर दिया। पुलिस ने महेंद्र का एफपीए (फोरेंसिक साइकोलॉजी एसेसमेंट) कराने को कहा लेकिन उसने वह भी नहीं कराया, जिसके बाद वह शक के घेरे में आ गया। बताया गया कि आरोपी महेन्द्र के खिलाफ भमोरा थाना में पांच मुकद्में दर्ज हैं। वह पहले भी जेल जा चुका है। पुलिस के द्वारा कराये गए परीक्षण में पाया गया कि मृतका के भोजन करने के बाद दो से चार घंटे में मौत हुई, हत्या की रात घर में मृतका और उसका बेटा आरोपी महेन्द्र ही मौजूद था।।
बरेली से कपिल यादव
