बरेली। शहर में आवारा कुत्तों का आतंक अब लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। मोहल्लों से लेकर बाजारों और शहर के बाहरी इलाकों तक कुत्तों के झुंड लोगों का पीछा कर रहे हैं और कई जगह राहगीरों पर हमला कर चुके हैं। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के साथ आए दिन घटनाएं सामने आने के बावजूद नगर निगम की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे है। 16 अगस्त को सीबीगंज के लटूरी गांव में छह साल की बच्ची इनायत की आवारा कुत्तों के हमले के बाद मौत ने इस समस्या की गंभीरता फिर सामने ला दी है। परिवार के मुताबिक बच्ची घर के बाहर खेल रही थी, तभी कुत्तों ने हमला कर दिया। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हालांकि लटूरी गांव नगर निगम सीमा से बाहर है लेकिन इस तरह की घटना शहर में लगातार हो रही हैं। उधर, शहर के इंदिरा और शास्त्री मार्केट में भी आवारा कुत्ते का आतंक सामने आया। व्यापारियों से लेकर चाय विक्रेता समेत कई लोगों को काटकर घायल कर दिया था। घायलों को जिला अस्पताल जाकर एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाना पड़ा। व्यापारियों का कहना था कि मार्केट में लंबे समय से आवारा कुत्तों का जमावड़ा है और नगर निगम से कई बार शिकायत के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। समस्या नई नहीं, कार्रवाई का इंतजार पुराना : शहर में आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर पहले भी नगर निगम की बैठकों में सवाल उठते रहे हैं। कई इलाकों में लोगों ने कुत्तों के झुंड और हमलों की शिकायतें की हैं। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। नगर निगम की ओर से कुत्तों की नसबंदी और पकड़ने के अभियान की बातें सामने आती रही हैं, लेकिन लोगों का सवाल है कि यदि अभियान चल रहा है तो सड़कों पर कुत्तों के झुंड कम क्यों नहीं हो रहे। कोर्ट के निर्णय पर कब अमल करेगा नगर निगम : सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि हर जिले में कम से कम एक एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर बनाया जाए। इनमें नसबंदी, सर्जिकल सुविधा, प्रशिक्षित स्टाफ और एंटी-रेबीज वैक्सीनेशन की व्यवस्था हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि रेबीज पीड़ित, अत्यधिक आक्रामक या लाइलाज बीमार कुत्तों के मामले में नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। नगर निगम ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। बढ़ रहीं घटनाएं तो एक सितंबर का इंतजार क्यों : बोर्ड बैठक में अधिकारियों के दावे और अब सामने आई इस दर्दनाक घटना ने नगर निगम के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जब आवारा कुत्तों के हमलों की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं, तो अभियान शुरू करने के लिए 1 सितंबर तक इंतजार क्यों। बच्ची की मौत के बाद लोगों की मांग है कि आवारा कुत्तों की धरपकड़ और नसबंदी के लिए अभियान को तत्काल प्रभाव से तेज किया जाए, ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो।
बरेली से कपिल यादव
