राम-अहिल्या प्रसंग सुन भाव-विभोर हुए श्रोता

बरेली/फतेहगंज पश्चिमी। नैमिषारण्य धाम से आए कथाव्यास श्रीराम के भक्तों का अपमान भगवान के लिए असहनीय अवध किशोर शास्त्री ‘सरस’ जी ने भक्तों को समझाया-“भक्तवत्सल भगवान श्रीराम अपना अपमान-निंदा-तिरस्कार तो सह सकते हैं लेकिन जो मूढ़ अहंकारवश उनके भक्तों पर अत्याचार करता है, ताड़का-सुबाहु, इंद्रपुत्र जयंत आदि की तरह उसे तीनों लोकों में कोई भी बचा नही सकता। असुरारि विष्णु के श्रीराम रूप में धरती पर अवतरित होने का मुख्य कारण भी यही है। कथाव्यास ‘सरस’ जी महाराज खिरका जगतपुर में नत्थूलाल पुजारी के मुख्य यजमानत्व में चल रही संगीतमय साप्ताहिक श्रीरामकथा के चौथे दिन बुधवार सायं खराब मौसम के बावजूद भारी तादाद में कथा पंडाल मे उमड़े। कथाव्यास ने समझाया कि कमाई ऐसी करो जो हर जगह काम आए। राम रतन धन ऐसा ही धन है। इस अमूल्य धन को पाने के बाद कुछ भी पाने को शेष नही रह जाता। अहिल्या उद्धार प्रसंग सुनाते हुए कहा-शापग्रस्त अहिल्या कहती हैं, यहीं आश्रम मे शिला रूप मे प्रभु राम की प्रतीक्षा करूंगी‌। अंतत: पतितपावन श्रीराम उन्हें दर्शन देकर उनका उद्धार करते हैं। परम भक्त जटायु भी रावण से युद्ध करके मरणासन्न होकर भी प्रभु राम की गोद में प्राण छोड़ने की आस में अत्यधिक सुख और आनंद का अनुभव करते है। धनुष यज्ञ में श्रीराम के स्वरूप का वर्णन करते हुए कथाव्यास समझाते हैं-जाकी रही भावना जैसी, प्रभु देखी तिन मूरत वैसी। कथासत्र मे सूबेदार मेजर वीरेंद्र पाल सिंह (सेवानिवृत्त), पूर्व प्रधान कृष्णपाल गंगवार, अरविन्द गंगवार, हरिशंकर, बड़के, रवींद्र, गुड्डू, अशोक रस्तोगी, गणेश ‘पथिक’ आदि विशेष रूप से उपस्थित रहेे।।

बरेली से कपिल यादव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *