दिन की शुरुआत ही इबादत से होगी तो बरकत महसूस होगी- फ़ैज़ान अशरफ़ हामिदी

* रमज़ान में टाइम मैनेजमेंट रोज़ा और नमाज़ के साथ संतुलित जिंदगी

सम्भल । रमजान बरकतों और रहमतों का महीना है। इस महीने में अल्लाह तआला हमें एक खास ट्रेनिंग देता है, और वह है टाइम मैनेजमेंट की। सहरी का वक्त तय, इफ्तार का वक्त तय, पाँचों नमाज़ों के औकात तय। यानी रमज़ान हमें सिखाता है कि एक मोमिन की जिंदगी बेतरतीब नहीं, बल्कि वक़्त के हिसाब से चलने वाली होनी चाहिए। टाइम मैनेजमेंट क्यों ज़रूरी है। जर्नल सेक्रेटरी तंज़ीम उलामा ए अहले सुन्नत सम्भल मौलाना फ़ैज़ान अशरफ़ हामिदी ने बताया कि कुरआन में आता है कि बेशक नमाज़ मोमिनों पर वक़्त मुकर्रर में फर्ज की गई है। इस आयत से साफ पता चलता है कि इस्लाम वक़्त की पाबंदी चाहता है। अगर नमाज़ अपने वक़्त पर पढ़ी जाए तो पूरा दिन अपने आप सही ढंग से बँट जाता है। इसलिए रमजान में सबसे पहले अपनी नमाज़ का शेड्यूल मजबूत करें। रमज़ान में बेहतर टाइम मैनेजमेंट कैसे करें। सुबह की सही शुरुआत सहरी से थोड़ा पहले उठें। तह’ जुद और दुआ के लिए कुछ मिनट निकालें। फिर सहरी करें और फज्र की नमाज अदा करें। फज्र के बाद 15-20 मिनट कुरआन पढ़ने की आदत डाल लें। दिन की शुरुआत ही इबादत से होगी तो बरकत महसूस होगी। दिन का प्लान बनाएंः चाहे आप नौकरी करते हों, कारोबार या तालीम में हों, अपना दिन पहले से तय करें। जरूरी काम पहले निपटाएँ। कोशिश करें कि बेवजह बातें और मोबाइल का इस्तेमाल कम हो। आराम का सही वक्त जुहर के बाद थोड़ा आराम कर लें। इससे थकान कम होगी और शाम तक रोज़ा आसान लगेगा। अस्र के बाद इबादत अस्र के बाद का वक़्त बहुत कीमती है। यह दुआ की कबूलियत का वक़्त है। इस समय सोशल मीडिया से दूर रहें और तिलावत, ज़िक्र और इस्तिग‌फार करें। इफ्तार में सादगी हल्का और सादा खाना लें। ज्यादा खाने से सुस्ती आती
है और तरावीह में ध्यान नहीं लगता। रात का संतुलन ईशा और तरावीह के बाद बहुत देर तक फालतू जागना ठीक नहीं। पर्याप्त नींद लें ताकि अगला दिन ताज़गी से गुज़रे। नौजवानों के लिए खास बात मेरे प्यारे नौजवानों, रमज़ान में अपनी आदतों को सुधारें। रोज़ का एक छोटा टारगेट बनाएं, जैसे रोज आधा पारा पढ़ना या पाँच वक्त की नमाज जमाअत से पढ़ना। छोटे-छोटे कदम बड़ी कामयाबी देते हैं। रमज़ान असल में टाइम मैनेजमेंट की बेहतरीन ट्रेनिंग है। अगर हमने इस महीने में अपने वकुत को सही इस्तेमाल करना सीख लिया, तो पूरी जिंदगी में कामयाबी और सुकून मिलेगा। अल्लाह तआला हमें रोज़ा और नमाज़ की पाबंदी के साथ बेहतर टाइम मैनेजमेंट की तौफीक अता फरमाए ।

— सम्भल से सैय्यद दानिश

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