फतेहपुर- फतेहपुर जिले से जिलाधिकारी ने फिर गौशालाओं का निरीक्षण करना प्रारंभ कर दिया, तो वहीं जिम्मेदार लोगों ने अपनी साख बचाने हेतु सुरक्षा व्यवस्था में सुधार लाने का काम शुरू कर दिया है।
गौशालाओं में रह रहे मवेशी बोल नहीं सकते, लेकिन दुखी होने के साथ-साथ खुश होने का एहसास कुछ पल के लिए जरूर करा सकते हैं। ऐसा ही कुछ द्रश्य गौशालाओं में देखने को मिल जाता है। जिलाधिकारी श्रुति जब गौशाला में ठहरे गौवंशों पर अपना प्यार जताने लगी है तो गौवंश बिना कुछ बोले खुशी का इजहार करने के साथ-साथ आभार जताने में पीछे नहीं रहे। यह नजारा जिलाधिकारी के गौशाला पहुंचने के बाद देखने को मिला।
आवारा पशुओं (गौवंशज) को लेकर जनपद में आए दिन खड़ी फसलों में हो रहे नुकसान को लेकर हो हल्ला सुनाई देता था, किन्तु जिलाधिकारी द्वारा बनाई गई रणनीति के बाद काफी कुछ बदला- बदला नजर आने लगा है। उत्तर प्रदेश सरकार की मंशारूप जिलाधिकारी के कड़े तेवर ने गौशालाओं की स्थिति को बदलने का काम शुरू कर दिया है। अब लापरवाह अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी का एहसास होने लगा है। जिससे आए दिन गौशालाओं को लेकर उठने वाले सवालों में कुछ कमी आने लगी। अब स्थिति यह हो गई है कि जिलाधिकारी श्रीमती श्रुति के गौशाला पहुंचने के बाद गौवंश भी अब उन्हें पहचानने लगे हैं। जिलाधिकारी गौशाला में ठहरे गौवंश पर जैसे ही उनके ऊपर हाथ फेरकर दुलार (प्यार) करना शुरू करती है तो वैसे ही गौवंश भी आभार जताने में पीछे नहीं रहते। यह नजारा कई बार देखने को मिल जाता है।
अब सवाल तो ऐसे लोगों से पूछना चाहिए जिनके पास समझने बूझने की शक्ति है। जो अपने बुजुर्ग हो या फिर जो बोल और समझ नहीं सकते उन्हें ठुकरा कर घर से बाहर निकाल देना ही उचित समझते है। अब क्या इनकी जिम्मेदारी नहीं बनती जो अपनों के सहारे की जरूरत के लिए तरश रहे है, जिन्हें काम निकल जाने के बाद कोई समझता नहीं है तो वहीं कोई और दूसरा अपना समझ कर उन्हें सहारा देने काम कर रहा है, जो बहुत ही सोचनीय है।
– राम बहादुर निषाद फतेहपुर
