हड़ताल के चलते नही हो रही ईटों की पथाई, भट्ठा मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट

बरेली। हड़ताल के चलते भट्ठों पर ईटों की पथाई नही हो रही है। इस कारण हजारो भट्ठा मजदूर घरो मे खाली बैठे है। उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। भट्ठा संचालक दिल्ली मे धरने की तैयारियों में जुटे है। जिले के भट्ठा संचालक जीएसटी की बढ़ी दर व कोयला की बढ़ी कीमतों को लेकर हड़ताल पर है। हड़ताल के कारण जिले के किसी भी भट्ठे पर ईटों की पथाई का काम शुरू नही हुआ है। भट्ठों पर हर वर्ष अक्तूबर माह मे ईंटों की पथाई चालू हो जाती थी। नवंबर माह में भट्ठे चालू हो जाते थे। भट्ठा संचालकों की हड़ताल को देखते हुए नवंबर में भी ईटो की पथाई का काम चालू होने की उम्मीद नही है। ईट पथाई का काम करने वाले हजारों मजदूर घरों पर खाली बैठे हैं। इस कारण उनके सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है। सिंधौली के भट्ठा मालिक चौधरी हेमेंद्र सिंह ने बताया कि एक भट्ठे से 350 से लेकर 400 लोगों का जीवकोपार्जन चलता है। जिले में लगभग 350 भट्ठे हैं। सीजन मे एक भट्ठे पर 50 लाख से 70 लाख ईटो का उत्पादन होता है। भट्ठा संचालक सुरेंद्र गंगवार ने बताया भट्ठों की हड़ताल चल रही है। भट्ठा संचालक नवंबर मे दिल्ली में होने वाले धरना प्रदर्शन की तैयारियों में जुटे है। भट्ठा न चलने से ईंटों का स्टाक कम होता जा रहा है। प्रथम श्रेणी की ईटें 7000 रुपये हजार एवं दूसरी श्रेणी की ईट 4000 से 4500 रुपये में बिक रही है। स्टॉक कम होने पर रेट बढ़ना तय माना जा रहा है। ऐसा हुआ तब मकान बनाना महंगा होगा।।

बरेली से कपिल यादव

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