बाड़मेर /राजस्थान- साहब एक महिने से परेशान हो रहें हैं, सरकारी स्कूलों, कालेजों और अन्य विभागों के लिए जाति प्रमाण पत्र बहुत जरूरी है अन्यथा हमारे को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा। पूरा परिवार आजकल आनलाइन किया गया है चाहे तो आप अपने सरकारी कार्यालयों में लगे हुए कम्प्यूटर पर देखिये लेकिन बच्चों के जाति प्रमाण पत्र जारी करने के लिए हमें टरकाया जाता है।
बच्चों के अन्य पिछड़ा वर्ग के केन्द्र और राज्य सरकार के जाति प्रमाण पत्र जारी करवा दिजिए जब मैं भी मन करता है सरकारी कार्यालयों के कर्मचारियों द्वारा हड़ताल कर देता है लेकिन आम आदमी के कामकाज कितना बाधित होता है इस बात पर कभी गौर किया है आपने हड़ताल पर आपके कर्मचारी गया है लेकिन आप नहीं ….
कलेक्ट्रेट परिसर में मिले ग्रामीण बुजुर्गों ने अपनी खुन्नस निकालते हुए कहा कि पहले से ही अपनी लेटलतीफी के लिए मशहूर सरकारी बाबू अपनी मागों के लिए हर बार की तरह इस बार भी अपनी वेतन विसंगतियों के कारण हड़ताल पर चले गए हैं इससे नुकसान सरकार को होता है या फिर ना, लेकिन पब्लिक को अपने जरूरी सरकारी दस्तावेजों को बनाने में जरूर होता है। तहसीलदार आफिस में आने वाले लोगों ने बताया कि सरकारी आफिसों के मलाईदार सीटों पर विराजमान सरकारी धन कुबेर कितने चालाकी से हड़ताल पर चले जाते हैं कम से कम हड़ताल पर जाने से पहले का अपना कामकाज तो निपटा कर जाते, लेकिन एक बात तो तय है कि महिने के अन्तिम सप्ताह में तनख्वाह बनाने के दौरान हड़ताल पर कभी नहीं जाते हैं क्योंकि उन्हें भी मालूम है कि हमारे घर परिवार कैसे चलेगा अब महिने का अन्तिम सप्ताह है और इनके तनख्वाह कौन बनाएंगे लोगों को परेशानी होती है तो कुछ दिनों तक इनके भी होनी चाहिये l
उच्च अधिकारी जरूर टेबल्स से चिपके हुए बेठे है हर कोई अपने आवश्यक दस्तावेजों को बनाने के लिए अधिकारियों से जी हजूरी करते देखा जा सकता है लेकिन कार्यालयों की आख और कान कहें जाने वाले सरकारी बाबूजी हड़ताल पर बेठे है, इससे सरकारी कार्यालयों का काम काज बाधित होने के साथ सरकारी कार्यालयों में आने वाले हजारों लोगों को कामकाज नहीं होने के कारण बैरंग कागज की तरह वापिस लौटना पड़ा।
कर्मचारी नेता रमेश डऊकिया ने बताया कि बाड़मेर जिले से सैकड़ों मंत्रालयिक कर्मचारी राजधानी जयपुर में शिप्रा पथ मानसरोवर में चल रहे महापड़ाव में गए हुए है। पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारी संगठन बाड़मेर के जिलाध्यक्ष ने बताया कि बाड़मेर जिले में जिला परिषद एवं 21 पंचायत समितियों तथा 689 ग्राम पंचायतों में कार्यरत मंत्रालयिक कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अपने कार्यालयों से अवकाश लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे है। इससे सरकारी कार्यालयों में आम आदमी के लिए नियमित काम काज बाधित होने के साथ विकास कार्याें की गति प्रभावित होने लगी है। बाड़मेर जिले के अठारह सौ कर्मचारियों में कलेक्ट्रेट के अधीनस्थ साढ़े तीन सौ और अन्य विभागों के मिलाकर दो हजार के लगभग होने चाहिए।
आवेदन करने वाले छात्रों ने बताया की हमारे को पहले से ही चार छः बार आनलाइन जाति प्रमाण-पत्र उपखड अधिकारी बाड़मेर द्वारा जारी किया गया है, लेकिन इसकी वैधता छः महीने से ज्यादा नहीं होने के कारण ज्यादातर छात्र छात्राओं को प्रतिवर्ष अप्रैल से जुलाई महीने में नया जाति प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए हमेशा धक्के लगाने की मजबूरी है। राज्य सरकार द्वारा आनलाइन जाति प्रमाण पत्र की वैधता बढानी चाहिए ताकि बार बार सरकारी कार्यालयों और ई मित्रों पर धक्के नहीं खाने पडेगा या फिर पूरा परिवार ही आनलाइन है इसलिए नया साफ्टवेयर बनाकर जनाधार कार्ड से अपलोड कर तुरंत ही जाति प्रमाण पत्र बनवाने के झझटो से बेरोजगार स्टुडेंट्स और विधालयों में अध्ययनरत विधार्थियो को राहत दिजिए ।
– राजस्थान से राजूचारण
