परिचायिकाओं को मिला पांच साल तक के बच्चों के पोषण पर जानकारी

  • छह महीने तक मां का दूध ही सर्वोत्तम आहार 
  • छह महीने बाद पूरक आहार भी जरूरी

वैशाली/बिहार- हाजीपुर के एक निजी होटल में दो बैच में एएनएम और जीएनएम का चार दिवसीय प्रशिक्षण बुधवार को समाप्त हो गया। प्रशिक्षण के पहले दिन सिविल सर्जन डॉ श्याम नंदन प्रसाद ने इसका विधिवत उद्घाटन किया था। चार दिवसीय यह प्रशिक्षण इन्फेंट यंग चाइल्ड फीडिंग पर आधारित था, जिसमें सभी एएनएम तथा जीएनएम को जीरो से लेकर 5 साल तक के शिशुओं को मां के दूध के अलावे शारीरिक और मानसिक विकास के लिए ऊपरी आहार के बारे में विस्तार से बताया गया। बुधवार को चौथे दिन सिविल सर्जन ने मौके पर पर कहा कि छह महीने तक नवजातों को सिर्फ मां का दूध का सेवन ही करना चाहिए। शिशुओं को छह माह तक मां का दूध मिले इसके लिए मां को भी अपने पोषण और खानपान का बेहद ख्याल रखना चाहिए। छह माह के बाद ही पूरक आहार देना शिशुओं को उचित होता है। शुरुआत में उन्हें पतली दाल या मसला हुआ भोजन ही देना अच्छा होता है। समय के साथ पूरक आहार की मोटाई और मात्रा में बढ़ोतरी करनी चाहिए, ताकि शिशु का शारीरिक एवं मानसिक विकास सही अनुपात में हो पाए।
 
छह माह तक के 47 प्रतिशत बच्चे ही करते हैं ब्रेस्ट फीडिंग:
 
सिविल सर्जन डॉ श्याम प्रसाद ने कहा कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 के अनुसार छह माह तक के वैसे बच्चे जो सिर्फ मां का दूध पीते हैं उनका प्रतिशत सिर्फ 47 है। यह एक चुनौती भरा टास्क है कि हमारे स्वास्थ्यकर्मी अधिक से अधिक लोगों को ब्रेस्ट फीडिंग और पूरक आहार के बारे में बताएं ताकि एक सही अनुपात में लोग इसे अपना सकें। मौके पर सीएस डॉ श्याम नंदन प्रसाद, डीसीएम निभा रानी सिन्हा सहित अन्य लोग मौजूद थे।

– बिहार से नसीम रब्बानी

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