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दरिंदगी के बाद बच्ची की हत्या करने के आरोपियों की दी गयी फांसी की सजा

बरेली – दिल्ली के चर्चित निर्भया गैंगरेप कांड की तरह बरेली के चर्चित जघन्यतम मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सुनील कुमार यादव की विशेष कोर्ट ने आरोपी मुरारीलाल और उमाकांत को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रीतराम राजपूत ने बताया कि नवाबगंज क्षेत्र के एक गांव में 29 जनवरी 2016 को 12 वर्षीय दलित बच्ची खेत में गन्ना छीलकर पत्ते लेने गई थी। बच्ची वापस घर नहीं लौटी। तलाश करने पर महेंद्र के सरसो के खेत में बच्ची का शव नग्नावस्था में पड़ा मिला था। आरोपियों ने बच्ची के गुप्तांग में लकड़ियों को ठूंसकर दरिंदगी की थी। पीड़िता के पिता की तहरीर पर नवाबगंज पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।

तत्कालीन इंस्पेक्टर नवाबगंज आरके सिंह ने 31 जनवरी 2016 को आरोपी मुरारीलाल को गिरफ्तार कर इस चर्चित हत्याकांड का खुलासा किया। आरोपी मुरारीलाल ने पुलिस को बताया कि उसने अपने साथी उमाकांत के साथ 12 वर्षीय बच्ची के साथ पहले गैंगरेप किया था। लड़की ने अपने मां-बाप से शिकायत करने की धमकी दी तो गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। आरोपियों ने बच्ची के गुप्तांग में लकड़ियां भी घुसेड़ दी थी। आरोपी मुरारीलाल के कब्जे से पीड़िता के कपड़े और आरोपी उमाकांत के कब्जे से सफेद चादर बरामद की थी। मृतका के पोस्टमार्टम में उसके शरीर पर 10 चोट के निशान पाए गए थे। पीड़िता के दलित वर्ग से होने के कारण इसकी विवेचना तत्कालीन सीओ नवाबगंज नरेश कुमार ने की थी।
इस चर्चित मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट सुनील कुमार यादव की विशेष कोर्ट में हुई। दोनों आरोपियों को विशेष कोर्ट से जमानत भी नहीं मिल सकी थी। दोनों जेल में हैं। आरोप साबित करने को एडीजीसी ने पीड़िता के परिजनों समेत 11 आरोपियों को पेश किया था। बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने आरोपियों के निर्दोष होने की दलील दी थी। वहीं एडीजीसी ने आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की दलील दी थी। दोनों पक्षो की दलीलों को सुनने के बाद विशेष कोर्ट ने बुधवार को दोनों आरोपियों को दोषी माना था। विशेष कोर्ट ने दोषियों की सजा निर्धारित करने को शुक्रवार की तारीख निर्धारित की थी। कोर्ट ने इसे जघन्य अपराध मानते हुए दोनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई।

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