8 अप्रैल को चतुर्ग्रही योग मे मनाई जाएगी सोमवती अमावस्या, पितरों को मिलेगी मुक्ति

बरेली। हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के अगले दिन अमावस्या तिथि पड़ती है। तदनुसार, इस साल 08 अप्रैल को चैत्र अमावस्या है। सोमवार के दिन पड़ने के चलते यह सोमवती अमावस्या कहलाएगी। सनातन धर्म में अमावस्या का विशेष महत्व है। सोमवती अमावस्या पर स्नान-दान आदि का फल कई गुना अधिक बढ़ जाता है। अमावस्या तिथि सोमवार की सुबह 3:31 से शुरू होगी और इस स्थिति का समापन भी इसी दिन मध्य रात्रि 11:50 पर होगा। इसी दिन 2080 संवत समाप्त होगा और अगले दिन नवरात्रि के साथ ही 2081 संवत का भी आगाज होगा। सबसे खास बात तो यह है सूर्य, चंद्र, शुक्र और राहु एक साथ मीन राशि में विद्यमान रहेंगे, जिस कारण अमावस्या पर चतुर्ग्रही योग का संयोग बन रहा है। जो चारों पुरुषार्थों की सरलता से प्राप्ति का कारक माना गया है। इसलिए इस बार अमावस्या का महत्व कई गुना अधिक बढ़ गया है। ज्योतिषाचार्य पंडित मुकेश मिश्रा के मुताबिक सोमवती अमावस्या के दिन स्नान, दान करने से पितृ तो प्रसन्न होते ही हैं। उनका आशीर्वाद बना रहता है। इस दिन समस्त शिव परिवार और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा अर्चना का विधान है। इसमे सभी को परिवार समेत गंगा स्नान और देव दर्शन करने चाहिए। गरुड़ पुराण में निहित है कि सोमवती अमावस्या तिथि पितरों के तपर्ण हेतु सर्वोत्तम होती है। इस दिन पितरों का विधिवत तर्पण करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। साथ ही घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। अतः बड़ी संख्या में साधक सोमवती अमावस्या तिथि पर गंगा समेत पवित्र नदियों में स्नान कर भगवान नारायण एवं पितरों की पूजा करते है।।

बरेली से कपिल यादव

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