संभल। मस्जिद बाबा बहाउद्दीन शाह लगभग 350 वर्षों से अधिक पुरानी ऐतिहासिक मस्जिद है। इसका अपना स्वतंत्र धार्मिक एवं ऐतिहासिक अस्तित्व है। मस्जिद बाबा बहाउद्दीन शाह का जामा मस्जिद से कोई संबंध नहीं है। इसके बावजूद कुछ लोगों द्वारा दोनों स्थलों को आपस में जोड़कर जिस प्रकार के दावे एवं प्रचार किए जा रहे हैं, वे अत्यंत गंभीर और चिंताजनक हैं।
तंज़ीम उलमाए अहले सुन्नत, संभल के जनरल सेक्रेटरी मौलाना फैजान अशरफ हामिदी ने कहा कि ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार का दावा केवल प्रमाणित दस्तावेजों और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर ही किया जाना चाहिए। सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर, बयान देकर अथवा व्यक्तिगत लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से किसी ऐतिहासिक स्थल के संबंध में भ्रामक जानकारी फैलाना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि संभल की ऐतिहासिक विरासत अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके संबंध में किसी भी प्रकार की गलत जानकारी न केवल आम जनता को भ्रमित करती है, बल्कि इससे सामाजिक वातावरण भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए ऐसे संवेदनशील विषयों पर सभी लोगों को जिम्मेदारी और संयम का परिचय देना चाहिए।
मौलाना फैजान अशरफ हामिदी ने प्रशासन से मांग की कि मस्जिद बाबा बहाउद्दीन शाह और जामा मस्जिद के संबंध में उपलब्ध ऐतिहासिक, राजस्व एवं अन्य सरकारी अभिलेखों के आधार पर स्थिति को स्पष्ट किया जाए, ताकि किसी प्रकार का भ्रम बाकी न रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत तथ्यों, भ्रामक दावों या अफवाहों के माध्यम से जनता को गुमराह करता पाया जाता है, तो प्रशासन को कानून के दायरे में उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। किसी को भी झूठी लोकप्रियता या व्यक्तिगत लाभ के लिए संभल की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत के साथ खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
उन्होंने संभल के नागरिकों से अपील की कि वे अपुष्ट सूचनाओं पर विश्वास न करें और न ही उन्हें सोशल मीडिया पर आगे प्रसारित करें। ऐतिहासिक तथ्यों को प्रमाणों के साथ सामने लाना और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।
“संभल की ऐतिहासिक विरासत किसी व्यक्ति की निजी लोकप्रियता का साधन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की अमानत है। इतिहास को प्रचार नहीं, प्रमाण और सत्य के आधार पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
— सम्भल से सैय्यद दानिश
