आजीवन दाग़ खटकते रहेगें हमारी भर्ती परिक्षाओं में,
राजस्थान/बाड़मेर – राज्य में दो दशकों से लगातार विवादों में रहने के बाद भी तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती का स्थायी पैटर्न और परीक्षाओं को कराने के लिए एजेंसी तय नहीं हो सकी है। हालत यह है कि भाजपा व कांग्रेस ने अपने-अपने समय के दौरान में खुद के पुराने पैटर्न को भी बदल दिया था। स्थायी परीक्षा एजेंसी नहीं होने से विवाद कम होने की बजाय दिनोदिन बढ़ते जा रहे हैं। इसका खामियाजा प्रदेश के सौलह लाख से अधिक बीएड व बीएसटीसी डिग्रीधारियों को नकल गिरोहों द्वारा किये गए अनुचित लाभ को बेरोजगार स्टुडेंट्स को भुगतना पड़ रहा है।
अशोक गहलोत सरकार द्वारा बेरोजगार स्टुडेंट्स को राहत देने के लिए रीट परीक्षा रद्द करने के बाद अब सरकार ने रीट द्वितीय लेवल के लिए दो परीक्षाओं को चयन का आधार बनाने की घोषणा की है। ग्रेड-पे के हिसाब से राजस्थान लोक सेवा आयोग को इस परीक्षा का जिम्मा मिलना बहुत मुश्किल है। ऐसे में कर्मचारी चयन बोर्ड को रीट के बाद होने वाली परीक्षा का जिम्मा मिलने की संभावनाएं बनती है। शिक्षक पात्रता परीक्षा की वजह से मौजूदा हालात में
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के विवादों में आने के बाद से परीक्षा एजेंसी के निर्धारण को लेकर जल्द उच्च स्तरीय समिति की बैठक भी होगी।
शिक्षक भर्ती कराने की जिम्मेदारी कर्मचारी चयन बोर्ड को दिए जाने की संभावना सबसे ज्यादा है। क्योंकि राजस्थान लोक सेवा आयोग के पास पहले से ही राज्य की अन्य सरकारी नौकरियां के लिए भर्तियों की जिम्मेदारी है। वहीं प्रदेश में कर्मचारी चयन बोर्ड का गठन होने के बाद पीटीआइ, एलडीसी, कनिष्ठ अभियंता, महिला पर्यवेक्षक आदि 3600 ग्रेड पे की भर्ती परीक्षाओं का जिम्मा दिया गया है। तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती के ग्रेड-पे के आधार पर भी यह परीक्षा चयन बोर्ड के हिस्से में आती है। जिला परिषदों के जरिए भी दूसरी परीक्षा का आयोजन होने की संभावना कम है। पिछली गहलोत सरकार के समय यह प्रयोग किया था। उस समय जगह जगह पर काफी विवाद हुए थे।
वर्ष 2003 में भाजपा सत्ता में आई तो शिक्षक भर्ती का जिम्मा जिला परिषदों से लेकर आरपीएससी को दिया गया। आरपीएससी ने पहली बार वर्ष 2004 में तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती कराई। लगभग 35 हजार पदों के लिए इस परीक्षा का आयोजन हुआ। इसके बाद वर्ष 2006 में फिर 30 हजार पदों के लिए इसी पैटर्न के जरिए भर्ती कराई गई।
सन् 2008 में कांग्रेस सत्ता में आ गई। वर्ष 2009 में निशुल्क अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम प्रभावी होने के कारण शिक्षक भर्ती से पहले 2011 में शिक्षक पात्रता परीक्षा हुई। वर्ष 2012 में भर्ती परीक्षा का जिम्मा आरपीएससी से लेकर जिला परिषदों को दिया गया। इस भर्ती में आरटेट के 20 प्रतिशत अंक लिखित परीक्षा के अंकों में जोड़कर जिला स्तर पर मेरिट बनाई गई। वर्ष 2013 में 20 हजार पदों के लिए कराई गई और जिम्मेदारी भी जिला परिषदों को दी गई। वर्ष 2016 में भाजपा ने भर्ती का पैटर्न बदल दिया। आरटेट को खत्म कर रीट के माध्यम से भर्ती हुई। इसमें 70 प्रतिशत रीट परीक्षा व 30 प्रतिशत स्नातक के अंकों का वैटेज जोड़ा गया।
वर्तमान में भर्ती का फिर से नया पैटर्न तैयार किया गया। स्नातक के अंकों का वैटेज कम करने की घोषणा हुई ओर 2022 में रीट द्वितीय लेवल की परीक्षा को रद्द कर दो परीक्षाएं कराने की सरकार द्वारा घोषणा हुई।
– राजस्थान से राजूचारण
