- एईएस के प्रभाव से जिले को मुक्त करने को लेकर जिला टास्क फोर्स की हुई बैठक
- चमकी के मामलों से बचने के लिए सावधानी जरूरी
मोतिहारी/बिहार- जिले को एईएस के प्रभाव से बचाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग एवं जिला प्रशासन के द्वारा तैयारी की जा रही है। इसके मद्देनजर सोमवार को जिला समाहरणालय परिसर में जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स की बैठक आहूत की गई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा, आईसीडीएस, पंचायती राज, समेत अन्य विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। जिलाधिकारी ने जिले में चमकी से बचाव व इलाज के संबंध में विभाग की तैयारी को लेकर सिविल सर्जन डॉ अंजनी कुमार, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी शरत चन्द्र शर्मा से जानकारी ली। साथ ही उन्होंने चमकी के नियंत्रणार्थ जिला एवं पीएचसी स्तर पर चमकी प्रभावित बच्चों के इलाज व दवाओं के साथ चिकित्सकों को अलर्ट रहने का आदेश दिया।
चमकी से बचाव को लगायी जा रहीं हैं चौपाल:
सीएस डॉ अंजनी कुमार ने बताया कि चमकी प्रभावितों के लिए पीएचसी, सदर और रेफरल स्तर पर उपचार की व्यवस्था की गयी है। पीएचसी में जहां दो बेड के स्पेशल एईएस वार्ड, सदर में दस बेड एवं पीकू वार्ड में भी इलाज की व्यवस्था की गयी है। उन्होंने बताया कि जिले में 3 चमकी के मरीज मिले जो इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं। उन्होंने बताया चमकी प्रभवित प्रखंडों के साथ जिले के अन्य स्थानों पर चौपाल लगाकर स्वास्थ्य कर्मियों, आशा, आंगनबाड़ी तथा जीविका दीदीयों की भी मदद से लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
गर्मियों में ज्यादातर चमकी के मामले देखे जाते हैं:
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ शरत चँद्र शर्मा ने बताया कि चमकी से छः माह से 15 वर्ष तक के बच्चे प्रभावित होते हैं। उन्होंने बताया कि चमकी में पहले काफी तेज बुखार होता है। बुखार के साथ शरीर में ऐंठन व अकड़न होती है। इसके बाद शरीर के तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली गड़बड़ाने लगती है। तंत्रिका तंत्र के प्रभावित होने के कारण मानसिक भटकाव होने लगता है। इस बीमारी में ग्लूकोज के लेवल की कमी देखी जाती है। उन्होंने बताया कि चमकी होने पर सरकारी एम्बुलेंस से या प्राइवेट वाहन से सीधे नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचना चाहिए बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए।
चमकी से बचाव के उपाय:
यूनिसेफ के जिला प्रतिनिधि धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि चमकी से बचाव के लिये अभिभावक अपने बच्चे को धूप से बचाएं। रात को किसी भी हालत में भूखे नहीं सोने दें। दिन में एक बार ओआरएस घोल जरूर पिलाएं। बच्चे को अधपके एवम सड़े गले फल नहीं खाने दें। बच्चा अगर घर में भी है तो घर की खिड़की व दरवाजा बंद नहीं करें। कमरे को हवादार रहने दें। साफ सफाई पर ध्यान दें। अपने क्षेत्र की आशा, चिकित्सकों व नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र के नम्बर अपने पास रखें।
मौके पर सीएस डॉ अंजनी कुमार, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ रंजीत राय, डीपीएम ठाकुर विश्वमोहन,
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी शरत चँद्र शर्मा,आईएमए अध्यक्ष डॉ आशुतोष शरण, केयर डीटीएल स्मिता सिंह, यूनिसेफ के जिला प्रतिनिधि धर्मेंद्र कुमार,आईसीडीएस के प्रभारी डीपीओ, भीडीसीओ धर्मेंद्र कुमार, रविन्द्र कुमार, सत्यनारायण उराँव,
आरबीएसके डीसी मनीष कुमार,चंद्रभानु सिंह व अन्य स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे।
– बिहार से नसीम रब्बानी
