शहर सीट पर सियासी सरगर्मी तेज: डॉ. अरुण कुमार के साथ प्रदीप सक्सेना का नाम भी चर्चा में

बरेली। भाजपा के मजबूत चुनावी आधार वाली शहर विधानसभा सीट पर आगामी चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज होती नजर आ रही है। टिकट के संभावित दावेदारों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। मौजूदा विधायक डॉ. अरुण कुमार का नाम स्वाभाविक रूप से चर्चा के केंद्र में है, वहीं लंबे समय से संगठन में सक्रिय प्रदीप सक्सेना ने भी अपनी दावेदारी को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज की हैं।

2022 के विधानसभा चुनाव में डॉ. अरुण कुमार ने भाजपा प्रत्याशी के रूप में 1,29,014 वोट हासिल कर 32,320 मतों के अंतर से जीत दर्ज की थी

एक तरफ स्थापित चेहरा, दूसरी ओर संगठन का पुराना कार्यकर्ता

शहर सीट की मौजूदा राजनीतिक तस्वीर में डॉ. अरुण कुमार एक स्थापित नाम हैं। वहीं प्रदीप सक्सेना की दावेदारी का आधार उनका लंबे समय से पार्टी संगठन के साथ जुड़ाव और चुनावी गतिविधियों में सक्रिय रहना बताया जा रहा है।

सक्सेना का कहना है कि उन्होंने 2022 में भी भाजपा से टिकट के लिए आवेदन किया था। उनके मुताबिक वर्ष 2012 से शहर और कैंट विधानसभा, लोकसभा, महापौर तथा सभासद चुनावों में लगातार पार्टी के लिए सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। मंडल स्तर के कार्यक्रमों से लेकर महानगर भाजपा के कार्यक्रमों में भी उनकी सहभागिता रही है।

“2012 से लगातार संगठन के साथ हूं”

संवाददाता से बातचीत में प्रदीप सक्सेना ने अपनी राजनीतिक सक्रियता का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका फोकस लंबे समय से संगठन के साथ काम करने पर रहा है।

उन्होंने कहा कि 2012 से लगातार विभिन्न चुनावों में पार्टी के लिए सक्रियता से कार्य किया है और संगठन के कार्यक्रमों में नियमित सहभागिता निभाई है। 2022 में भी पार्टी से टिकट के लिए आवेदन किया था।

सक्सेना की दावेदारी में सबसे ज्यादा जोर उनके संगठनात्मक अनुभव और लंबे समय से चुनावी मैदान में पार्टी के लिए सक्रिय रहने पर है।

कायस्थ समाज का समीकरण भी चर्चा में

शहर विधानसभा के सामाजिक समीकरणों में कायस्थ समाज की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं। डॉ. अरुण कुमार भी कायस्थ समाज से आते हैं और उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक प्रोफाइल में उनकी जाति कायस्थ दर्ज है।

ऐसे में यदि पार्टी के भीतर संभावित नामों पर मंथन तेज होता है तो सामाजिक प्रतिनिधित्व के साथ-साथ संगठनात्मक सक्रियता, चुनावी प्रदर्शन और स्थानीय स्वीकार्यता जैसे पहलू भी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।

अब नजर संगठन के फैसले पर

फिलहाल भाजपा की ओर से शहर विधानसभा सीट के लिए किसी नए प्रत्याशी या मौजूदा विधायक के संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। लिहाजा दावेदारों के बीच चल रही गतिविधियां अभी राजनीतिक चर्चाओं और संभावनाओं के स्तर पर हैं।

शहर सीट पर इस समय तस्वीर दो प्रमुख पहलुओं के बीच दिखाई दे रही है—एक ओर चुनावी प्रदर्शन के दम पर स्थापित मौजूदा नेतृत्व और दूसरी ओर लंबे समय से संगठन में सक्रिय कार्यकर्ता की दावेदारी।

अब देखना यह है कि आने वाले समय में भाजपा के भीतर दावेदारों की सक्रियता किस रूप में सामने आती है और अंतिम निर्णय के समय संगठन किन राजनीतिक एवं संगठनात्मक पहलुओं को प्राथमिकता देता है।

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