लंबे अरसे से कुलपति के इंतजार में चल रहे BHU, को मिले नए कुलपति

वाराणसी। चार महीने के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति पद की कुर्सी का सूनापन खत्म हुआ। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय
(जे एन यू) के मालीक्यूलर बायोलॉजी एंड जेनेटिक इंजीनियरिंग लैब्रोटी के प्रोफेसर राकेश भटनागर बीएचयू के कुलपति पद पर नियुक्त किये गयें। राष्ट्रपति और यूनिवर्सिटी के विजिटर रामनाथ कोविंद ने 26 मार्च को अपने प्रथम बार काशी आगमन के तीन दिन पूर्व जेएनयू के प्रो. राकेश भटनागर की नियुक्ति कर इस पद के लिए चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है। सूत्रों के अनुसार नियुक्ति की सूचना ई-मेल के जरिये गुरुवार शाम बीएचयू प्रशासन को प्राप्त हुआ।

जानीये राकेश भटनागर के बारे में

प्रोफेसर राकेश भटनागर कुमायू विश्वविद्यालय नैनीताल में कुलपति और जेएनयू में अलग-अलग प्रशासनिक पदों पर जिम्मेदारी का निर्वहन कर चुके हैं। बताते चलें कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में 26 नवंबर 2017 को कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी का कार्यकाल खत्म होने के बाद से ही नए कुलपति की नियुक्ति को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थी। विश्वविद्यालय के सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राजेश सिंह ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय को मेल मिल चुका है। प्रो. राकेश भटनागर की नियुक्ति बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वह फरवरी, 2016 में जेएनयू में बहुचर्चित भारत विरोधी नारेबाजी मामले की जांच कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

बहुत ही सख्त मिजाज कुलपति प्रो भटनागर

प्रो. राकेश भटनागर को सख्त मिजाज का माना जाता है। वामपंथी विचारधारा का बड़ा केंद्र माने जाने वाले जेएनयू से बीएचयू में प्रो. भटनागर की नियुक्ति को भी अलग तरह से देखा जा रहा है। दो दिन पहले ही केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावेडकर ने बीएचयू समेत देश के 52 विश्वविद्यालयों को स्वायत्तशासी बनाए जाने की घोषणा भी की थी।

भटनागर की चुनौतियां

परिसर को अराजकता से मुक्ति दिलाकर शांति का माहौल बनाना, छात्रावासों में मूलभूत सुविधाओं की मॉनीटरिंग, छात्र-छात्राओं से विश्वविद्यालय प्रशासन का तालमेल बनवाना, विश्वविद्यालय में आपसी गुटबाजी की राजनीति से दूर रहना, नियुक्तियों में पारदर्शिता लाने के साथ ही भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना।

एक नजर पूर्व कुलपति पर

बीएचयू के पूर्व कुलपति कुलपति प्रो जी सी त्रिपाठी अपनी नियुक्ति होने के बाद लगातार विवादों के घेरे में रहे। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री प्रो त्रिपाठी नवंबर 2014 में मानव संसाधन मंत्रालय ने की थी। प्रो जी सी त्रिपाठी आर एस एस से जुड़े रहे हैं, कुलपति बनने के बाद उन पर आरएसएस की विचारधारा को बीएचयू में थोपने का आरोप लगता रहा है। मैगसेसे अवॉर्डी संदीप पाण्डेय को हटाने का मामले से लेकर कैंपस में शाकाहारी भोजन की अनिवार्यता तक के मामले को लेकर चर्चाएं थी कि प्रो पाण्डेय ने संघ की विचारधारा को मानने से इनकार कर दिया था और इसी वजह से उन्हें हटा दिया गया। कहा जा रहा है कि प्रो. भटनागर की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब छात्राओं पर लाठीचार्ज मामले की जांच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस V.K. दीक्षित की जांच रिपोर्ट में प्रो. त्रिपाठी को क्लीनचिट मिलने का दावा किया जा चुका है। हालांकि मामले की की मजिस्ट्रेटी जांच और क्राइम ब्रांच की जांच का नतीजा अभी तक सामने नहीं आया है। सर सुंदरलाल अस्पताल में गत वर्ष जून में एक दर्जन से अधिक मरीजों की मौत के मामले की भी निर्णायक रिपोर्ट नहीं आई है। इतना ही नही प्रो. त्रिपाठी के कार्यकाल में की गई नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस बीच परिसर में आए दिन किसी न किसी मुद्दे पर आंदोलन हो रहा है। देखना यह है कि नव नियुक्त कुलपति प्रो भटनागर बीएचयू की उम्मीदों पर कितना खरा उतर पातें हैं।

रिपोर्ट-:महेश कुमार राय वाराणसी सिटी

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