सहारनपुर – भारत सरकार की ओर से मॉरिशस में स्थित भारतीय उच्चायोग में संस्कृति सचिव व भारत सरकार के सबसे बड़े सांस्कृतिक केंद्र की निदेशक के रूप में अपना कार्यकाल पूर्ण कर भारत लौटीं जानी मानी योग गुरु, कथक नृत्यांगना व संस्कृति विशेषज्ञ आचार्य प्रतिष्ठा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से राष्ट्रपति भवन में शिष्टाचार भेंट की। इस भेंट के दौरान आचार्या प्रतिष्ठा ने अपनी मारिशस प्रवास की उपलब्धियां साझा करने के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को लेकर संस्कृति व योग के क्षेत्र में नई सम्भावनाओं पर भी चर्चा की।
आचार्य प्रतिष्ठा ने अपने मॉरिशस के कार्यकाल के दौरान संपन्न हुई महामहिम राष्ट्रपति कोविंद जी की मॉरिशस यात्रा के प्रभाव से गहराये दोनों देशों के प्रगाढ़ सम्बन्धों पर भी चर्चा की।
वरिष्ठ राजनयिक के रूप में मॉरिशस व भारत के सम्बन्धों में आचार्या प्रतिष्ठा के सांस्कृतिक व आध्यात्मिक गतिविधियों के माध्यम से दिए गए योगदान का ही ये असर था कि मॉरिशस के राष्ट्रपति पृथ्वीराज सिंह रूपन ने आचार्या प्रतिष्ठा को सपरिवार राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित कर सहभोज के साथ विदाई समारोह किया था व सांस्कृतिक गतिविधियों के कई विषयों पर द्विपक्षीय संभावनाओं पर चर्चा की थी। राष्ट्रपति कोविंद ने पूरी जानकारी लेने के बाद दोनो देशों के संबंधों को प्रगाढ़ करने में कला व संस्कृति की भूमिका को सराहा। सांस्कृतिक आदान प्रदान का ही ये प्रभाव रहा कि आचार्या प्रतिष्ठा संस्कृति केंद्र की निदेशक के रूप में पहली राजनयिक हैं जिनके सम्मान में मारिशस के राष्ट्रपति द्वारा भोज दिया गया। ज्ञातव्य है कि आचार्या प्रतिष्ठा की आयुष मंत्रालय भारत सरकार की मधुमेह नियंत्रण योग प्रोटोकॉल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका के बाद, कोरोना की वैश्विक महामारी के दौर में वैक्सीन विकसित होने से पहले मोक्षायतन योग संस्थान द्वारा लोक कल्याण के लिए बनाई गई कोविड रोधी योग प्रोटोकॉल की विशेषज्ञ समिति की सदस्य होने के नाते अनेकों की जान बचाने वाले कोरोना रोधी योग प्रोटोकॉल की एक प्रति भी राष्ट्रपति को भेंट की।
राष्ट्रपति कोविंद से भेंट उपरांत अपने शहर सहारनपुर लौटने पर आचार्या प्रतिष्ठा ने अपनी हर सफलता व उपलब्धि का श्रेय अपने माता पिता, गुरुजनों व अपने शहर से प्राप्त अवसरों व अनुभवों को दिया।
– सहारनपुर से सुनील चौधरी
