राफिया शबनम नें विपक्ष के नेताओं के साथ मिलकर ईवीएम मशीन के मुद्दे पर सरकार को घेरा

बरेली – सबका हक़ फाउंडेशन बरेली की अध्यक्ष राफिया शबनम नें विपक्ष के नेताओं के साथ मिलकर ई .वी .एम मशीन के मुद्दे पर प्रेस वार्ता कर सरकार को घेरा।उन्होने सवाल उठाते हुए कहा कि हमारे देश में सबसे पहले 1982 में 50 पोलिंग बूथ पर ई०वी०एम० का ट्रायल किया गया और 2004 से पूरे देश में ई०वी०एम० से चुनाव हुए। 2014 में आठ निर्वाचन क्षेत्रों में V.V.PAT वाली ई०वी०एम० में चुनाव हुए। परन्तु आज पूरे देश में आधुनिक V.V.P.AT सहित वाली मशीन से चुनाव हो रहे है।

उन्होने आरोप लगाते हुए कहा कि BEL (Bharat Electronic LTD) EC.IL (Electronic Corporation India LTD इवीएम बनाने वाली कम्पनियाँ है। इनके बोर्ड ऑफ डायरक्टरर्स में सात सदस्य है। जिनमें से चार भारतीय जनता पार्टी से है। ई०बी०एम० मशीन जापान ने बनाई थी लेकिन आज वहाँ बैन है।

    भारत, भूटान, नेपाल, जार्डन, मालदीप, नामेवीया में ई०वी०एम० से चुनाव होते है लेकिन इग्लैड,फास, जर्मनी नीदरलैण्ड व संयुक्त राज्य अमेरिका सहित दुनिया के कई देशों ने ई०वी०एम० के उपयोग पर प्रतिबन्ध लगा दिया है। ब्रिटेन मे भी बैलट पेपर से चुनाव होता है। वहीं तीन साल से इस पर चर्चा चल रही है। परन्तु खुफिया एजेंसी और निर्वाचन आयोग को डर है कि इसे हैक किया जा सकता है।

    मशीन की कार्य प्रणाली -Ballet Box V.V.P.A.T+ Control System की चिप अलग अलग है। कन्ट्रोल सिस्टम की चिप Preloaded है। तो Hidden Load भी किया जा सकता है। बटन दबाने पर सिंगंनल V.V.P.A.T. तक पहुंचकर कट जाता है। परन्तु Singnal एक ही वार में Control System तक पहुचना चाहिए। चिप को Control System में डालने से पहले Program को परिणाम के अनुरुप डाला जा सकता है। नम्बर ऑफ वोट Control System में बढ़ाये जा सकते हैं। Source Code का भी पता नहीं है।

    VVPAT. पर्ची का मिलान किया जा सकता है। परन्तु हर बूथ पर सिर्फ पाच प्रतिशत पर्ची का ही मिलान किया जाना सन्देह जनक है। Software भी बदला जा सकता है। 100 से 500 मीटर की दूरी से भी परिणाम प्रभावित हो सकता है। 2019 में मशीन की बाहरी स्वरुप बदला गया किन्तु मशीन की PCB में ट्रास मीटर और रिसीवर इतना पुराना है जो कभी रेडियों, ट्राजिस्टर और टी०वी० में डलता था। Mock Poll जब किया जाता है तो मशीन में 50 वोट डाल कर देखे जाते है। अगर 5 गलत है तो 5 मशीने हटा दी जाती है। 20 भी तो गलत हो सकती है।Mock Poll ट्रायल पोलिग एजेन्ट के सामने ही होता है आम जन के सामने क्यों नहीं। मशीनों को पहले से बोट फीड करके स्ट्राग रुम तक ले जाया जा सकता है क्योंकि 19 लाख मशीने गायब है। मैमोरी और प्रिंटर इसमें भी है और कम्प्यूटर में भी है। जगह जगह बोटिंग मशीनों का गाडियों में मिलना सन्देह पैदा करता है। फिर जब चाँद पर रखी चीज जमीन से कन्ट्रोल हो सकती है। तो फिर ई०वी०एम० की चिप में Program preloaded क्यों नहीं हो सकता।

    आज इस प्रेस वार्ता के दौरान रफिया शबनम, (अध्यक्ष) रविन्द्र सहारा (सचिव)  के साथ अन्य विपक्ष के स्थानीय नेता भी मौजूद रहे।

    – बरेली से तकी रज़ा

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