मुसलमान प्रधानमंत्री मोदी की मुखालफत करें बंद करें- शहाबुद्दीन रज़वी

*अब टकराव का वक्त नहीं दोस्ती का बढ़ाये हाथ।

बरेली – भारत में चल रहे लोकसभा चुनाव में वोटो के ध्रुवीकरण को लेकर काफी चर्चा चल रही है इसी बीच भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुसलमानो के प्रति अपने लगाव को जाहिर किया।
उनकी इस सोच व फिक्र पर आल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने प्रेस को जारी एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक न्यूज चैनल पर इंटरव्यू के दौरान प्रधानमंत्री ने अपने मन की बात रखते हुए कहा कि उन्होंने कभी हिंदू-मुस्लिम के बीच कुछ कोई भेदभाव नहीं किया, बल्कि मेरे कई अच्छे मुस्लिम मित्र है मेरा बचपन मुस्लिम परिवार में बीता है। मैं जिस दिन हिंदू मुस्लिम करुंगा उस दिन सार्वजनिक जीवन में रहने योग्य नहीं रहूंगा। उन्होंने आगे कहा कि मैं ऐसा नहीं करुंगा, ये मेरा संकल्प है।

मौलाना ने कहा कि प्रधानमंत्री की मुसलमानो के प्रति यह सोच उनको बाकी सभी नेताओं से अलग थलग बनाती है यह तो जगजाहिर है कि प्रधानमंत्री देश में एकता पसंद करते हैं, क्योंकि यही वह चीज है जो देश में भाईचारे को बढ़ावा देती है वह सभी धर्मों को बहुत ही सम्मान देते हैं क्योंकि हमारा संविधान भी यही कहता है कि देश में एकता, अखंडता या भाईचारा कायम रहेगा, तभी देश का विकास सम्भव हो सकता है, क्योंकि एकता में ही शक्ति है।
मौलाना ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने हमेशा रमज़ान, ईद, मोहर्रम, और पैगंबरे इस्लाम के जन्म दिन पर अपना पैगाम जारी करके मुसलमानो को मुबारकबाद देते आयें है। अब ऐसी परिस्थितियों में मुसलमानो को चाहिए कि प्रधानमंत्री की मुखालफत न करें और विरोध बंद कर दे। क्योंकि प्रधानमंत्री मुस्लिम समुदाय से अपने आप को जोड़कर देखना चाहते है तो हमें भी चाहिए कि हम उनके मान की बात का सम्मान करते हुए उनके प्रति साकारात्मक रुख़ अपनाएं। हमेशा किसी व्यक्ति की एकतरफा मुखालफत से तकराव बढ़ता है और टकराव से समाज की तरक्की नहीं हो सकती। इसलिए मैं मुसलमानो से अपील करता हूं कि अब टकराओ के बजाए प्रधानमंत्री से दोस्ती का हाथ बढ़ाना चाहिए।

संवाददाता तकी रज़ा

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