मतदान से पहले सूची में करें नाम चैक अन्यथा दो दर्जन दस्तावेजों के बावजूद भी नहीं कर पायेगें मतदान

बाड़मेर / राजस्थान- बाड़मेर जैसलमेर बालोतरा लोकसभा चुनावो की घोषणा के साथ ही अपने अपने पक्ष में ज्यादा से ज्यादा मताधिकार करने के इन्तजार में लगे जन प्रतिनिधियों , नये युवा मतदाताओं में जागरूकता जरूर बढ गई है। नये मतदाताओं के नाम वोटर लिस्टो में बीएलओ द्वारा जोड़े गए थे और उनके वोटिंग कार्ड भी निजी कम्पनी द्वारा समय पर तैयार नहीं होने के कारण नहीं मिला है। एक जनवरी दो हजार चौबीस तक के युवा मतदाताओं के पहले हमेशा – हमेशा मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों में शामिल करने के लिए आवेदन लेने के बाद अंतिम तिथि तक मतदाता सूचियों में शामिल होता था और समयानुसार वोटिंग कार्ड मतदाताओं को दिया जाता था इस बार लेटलतीफी के कारण हजारों मतदाताओं को वोटिंग कार्ड नही मिलेगा इसलिए निर्वाचन आयोग द्वारा एक दर्जन से ज्यादा सरकारी दस्तावेजों से मतदाताओं को मताधिकार करने का हक़ दिया गया है ताकि कोई भी मतदान करने के अधिकार से पीछे न रहेगा । आजकल आनलाईन सिस्टम के साथ ही आधार कार्ड लेकर मतदाताओं को जोड़ने का प्रयोग किया गया है लेकिन फिर भी जनवरी तक अठारह साल के युवा मतदाताओं के नये नाम जोड़ने की निर्वाचन आयोग द्वारा शुरुआत की गई है लेकिन फिर भी लोकसभा चुनाव के बाद में वोटर लिस्ट में हो रही भरपूर खामियां को दुरूस्त करने की सख्त जरूरत है।

कल अखबारों में मतदान करने से सम्बन्धित खबर ” बाड़मेर जिला निर्वाचन अधिकारी को भी वोटिंग कार्ड नही मिला जनवरी से हजारों मतदाताओं को वोटिंग कार्डों का है इन्तजार ” प्रकाशित होने के बाद में बाड़मेर उप जिला निर्वाचन अधिकारी राजेंद्र सिंह चांदावत ने बताया कि मतदाताओं की सुविधा के लिए निर्वाचन आयोग ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यदि किसी वोटर का नाम मतदाता सूची में दर्ज है, लेकिन उसके पास किसी वजह से निर्वाचक फोटो पहचान पत्र उपलब्ध नहीं है, तो भी वह वैकल्पिक पहचान दस्तावेजों को दिखाकर मतदान केंद्रों पर मतदान कर सकेगा।

चुनावों में वोटिंग करने और मतदाताओं की लिस्टिंग के बारे में विशेष जानकारी रखने वाले सेवानिवृत्त इन्जीनियर बी एल शर्मा ने कहा कि एपिक के संबंध में लेखन, अशुद्धि, वर्तनी की अशुद्धि इत्यादि को नजरअंदाज कर देना चाहिए। बशर्ते निर्वाचक की पहचान एपिक से सुनिश्चित की जा सके। यदि कोई निर्वाचक फोटो पहचान पत्र प्रदर्शित करता है जो किसी अन्य विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा जारी किया गया है, ऐसे एपिक पहचान स्थापित करने हेतु स्वीकृत किए जाते थे। बशर्ते उस निर्वाचक का नाम, जहां वह मतदान करने आया, उस मतदान केंद्र से संबंधित निर्वाचक नामावली में उपलब्ध हो। फोटोग्राफ इत्यादि बेमेल होने के कारण निर्वाचक की पहचान सुनिश्चित करना संभव न हो तब निर्वाचक को उपरोक्त वैकल्पिक फोटो दस्तावेज को प्रस्तुत कर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं।

पूर्व में मतदाताओं को अपने मताधिकार करने के लिए फोटो युक्त पहचान के लिए प्रस्तुत दो दर्जन दस्तावेजों में से भारत निर्वाचन आयोग द्वारा प्रदाय किया गया मतदाता पहचान पत्र, भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका, काम के बदले अनाज योजना के तहत जारी पीला राशन कार्ड, गरीबी रेखा के नीचे हितग्राहियों के लिए जारी नीला राशन कार्ड, राशन कार्ड, बैंक, किसान, डाकघर की पासबुक और शस्त्र लाइसेंस को शामिल किया गया है। साथ ही संपत्ति दस्तावेज जैसे- पट्टा, रजिस्ट्री आदि, विकलांगता का प्रमाण-पत्र, निराश्रित प्रमाण-पत्र, सरकार द्वारा जारी संग्राहक पहचान पत्र, सहकारी समिति का अंश प्रमाण-पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लायसेंस, आयकर पहचान पत्र, आधार कार्ड,पैन कार्ड भी मतदाता पहचान के लिए दस्तावेजों में शामिल थे।

ये दस्तावेज भी पहले मताधिकार करने में सहायक होते थे जैसे राज्य या केंद्र सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, स्थानीय निकाय या अन्य निजी औद्यौगिक घरानों द्वारा उनके कर्मचारियों को जारी किए जाने वाले सेवा पहचान-पत्र, छात्र पहचान-पत्र, सक्षम प्राधिकारियों द्वारा जारी अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आदिवासी प्रमाण-पत्र, पेंशन दस्तावेज जैसे कि भूतपूर्व सैनिक पेंशन बुक, पेंशन अदायगी आदेश, भूतपूर्व सैनिक विधवा, आश्रित प्रमाण-पत्र, रेलवे पहचान पत्र और स्वतंत्रता सेनानी पहचान-पत्र में से कोई एक दस्तावेज भी मान्य किया जाएगा। मतदान के दौरान इन सभी में से कोई एक उपलब्ध होना चाहिए। इसके अलावा पीठासीन अधिकारी ऐसा कोई अन्य अभिलेख भी स्वीकार कर सकेगा, जिससे वह मतदाता की पहचान के संबंध में संतुष्ट हो सके। यदि कोई मतदाता दस्तावेज प्रस्तुत करने पर असफल रहता है तो पीठासीन अधिकारी स्थानीय बूथ कार्यकर्ता, पटवारी, शिक्षक, ग्राम पटेल, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी सहायिका इत्यादि कर्मियों या किसी प्रतिष्ठित स्थानीय निवासी से उसकी पहचान स्थापित करने के बाद उसे मत पर्ची प्रदान कर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेगा।

उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि पहचान के लिए एक दर्जन वैकल्पिक फोटोयुक्त पहचान दस्तावेजों में से कोई एक मताधिकार करने के दौरान पहचान के लिए दिखाना होगा। जैसे आधार कार्ड, बैंक-डाकघर की फोटोयुक्त पासबुक, मनरेगा जॉब कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, भारतीय पासपोर्ट, फोटो सहित पेंशन दस्तावेज, राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के तहत आरजीआई द्वारा जारी स्मार्ट कार्ड, श्रम मंत्रालय की योजना के तहत जारी स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड व सांसद, विधायकों और एमएलसी को जारी पहचान पत्र, केंद्र और राज्य सरकार, पीएसयू, सार्वजनिक लिमिटेड कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को जारी फोटोयुक्त सेवा पहचान पत्र एवं भारत सरकार के सामाजिक न्याय मंत्रालय द्वारा दिव्यांगजनों को जारी यूनिक डिसेबिलिटी आईडी।

– राजस्थान से राजूचारण

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