बृज में भगवान के ऐश्वर्य की जगह माधुर्य का प्रभाव और नितांत अपनापन ही बृजभाव – कविचंद्र दास

बरेली- बरेली के नेकपुर स्थित सुविख्यात ललिता देवी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन से पधारे कथाव्यास श्री कविचंद्र दास ने आज की कथा में बताया कि बृज में भगवान के ऐश्वर्य की जगह माधुर्य का प्रभाव है! भगवान से नितांत अपनेपन को ही बृजभाव कहते हैं! जबकि वैकुंठ में भय और आदर का संबंध है!…भक्ति के वर्धन हेतु एकादशी का व्रत अनिवार्य है! भगवान के पिता नंदबाबा भी एकादशी व्रत रखते थे! एकादशी को जो अन्न खाता है, वो पाप खाता है! कथा के दौरान एकादशी आए, तो उसका पालन अवश्य करना चाहिए! एकादशी व्रत रखने से पंद्रह दिनों के संचित पाप नष्ट हो जाते हैं! रासलीला का वर्णन करते हुए कथाव्यास ने बताया कि श्रीकृष्ण एकमात्र पुरुष हैं! बाक़ी सब प्रकृति है!.गोपी उद्धव संवाद से ये सिद्ध होता है कि कोई कितना भी बड़ा ज्ञानी क्यों न बन जाए, भगवद प्रेम के बिना वो अधूरा ही रहता है!…कथा में बच्चे भी बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं! कल २० फरवरी मंगलवार को कथा का विश्राम है!

– बरेली से सचिन श्याम भारतीय

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