पूर्व केंद्रीय मंत्री और रायपुर के महापौर फरिश्ता बनकर पहुंचे परी की जिंदगी बचाने

झांसी- कहते है जिसका कोई नहीं उसका खुदा है यारो ऐसा ही कुछ परी के मामले में सामने निकलकर आया। विगत दिनो नगरा के हीरापुरा निवासी धीरेन्द्र की तीन माह की बच्ची के दिल में छेद के इलाज को रायपुर ले जाने के लिए जहां पत्रकार पुलिस और समाज सेवियों ने मदद की तो वहीं रायपुर में मदद के लिये फरिश्ता बन कर वहां के महापौर सामने आये। इसमें बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई पूर्व ग्रामीण विकास राज्यमंत्री प्रदीप जैन आदित्य ने।
आपको बताते चले कि 3 मई को पत्रकार कुन्दन सोलंकी को एक समाज सेवी ने बताया कि प्रेमनगर के हीरापुरा निवासी धीरेन्द्र की तीन माह की बेटी परी के दिल में छेद है और वह इस समय जमर्नी अस्पताल में भर्ती है पर धीरेन्द्र अपनी बेटी को इलाज के लिए रायपुर छत्तीसगढ़ ले जाना चाहेता है क्योकि वहां इसका फ्री इलाज होता परन्तु धीरेन्द्र की आर्थिक स्थिति इतनी भी नहीं थी कि वह रायपुर ले जाने के एम्बुलेन्स में आने वाले 14 हजार रूपये का खर्च उठा सके। तब कुन्दन सोलंकी मीडिया क्लब के अध्यक्ष मुकेश वर्मा पत्रकार इमरान खान, नीरज साहू व समाज सेवी श्रीराम नरवरिया ने मिलकर अपनी तरफ से व पुलिस कर्मी और समाज सेवियों की आर्थिक सहायता से पीड़ित को एम्बुलेन्स में आने वाला खर्च का पैसा दिया परन्तु रायपुर पहुंचने पर अस्पताल से यह कहकर लौटा दिया गया कि बच्ची का इन्फेक्शन खत्म होने पर ही इलाज होगा अब धीरेन्द्र की मुश्किल बढ़ गई क्योंकि प्राईवेट अस्पताल में वहां रहकर इन्फैक्शन का इलाज कराना उसके बस की बात नहीं थी पर इस बड़ी मुसीबत में पूर्व मंत्री प्रदीप ने का लैटर काम आया जो रायपुर जाने से पहले धीरेन्द्र के लिये प्रदीप जैन ने पहुंचाया था उस पर रायपुर के कांग्रेस से महापौर प्रमोद दुबे का फोन नम्बर अंकित था जब धीरेन्द्र ने वहां के महापौर प्रमोद दुबे को सारी बात बताई तो उन्होंने धीरेन्द्र से कहा कि मेरे पास पूर्व मंत्री प्रदीप जैन का फोन आ चुका है और मै आज बाहर हूँ कल में आकर तुम से मिलंूगा और महापौर ने एक निजी अस्तपाल में बच्ची को भर्ती कर दिया और दूसरे दिन महापौर भी दूसरे फरिश्तो के रूप मे परी से मिलने पहुंचे महापौर ने विस्तार पूर्वक पीड़ित की बात सुनी साथ ही अस्पताल में नगद दस हजार रूपये की सहायता की और तो और अस्पताल का चार दिन का 25 हजार का सारा खर्च भी अपनी जेब से दिया साथ ही पीड़ित परिवार को दिल्ली एम्स भिजवाने के लिये अपनी ओर से सारा प्रबंध किया। इस कहते है मानवता यदि प्रदीप जैन और महापौर प्रमोद दुबे यह मदद नहीं करते तो परी की जिन्दगी का अब तक क्या होता यह समझने की जरूरत नहीं है।
-उदय नारायण, झांसी

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