नहरें बेपानी, कैसे हो किसानी

कुशीनगर- बिहार की सीमा से लगा कुशीनगर जनपद मुख्य रूप से गन्ना उत्पादन के लिए जाना जाता रहा है किन्तु एक ओर जहाँ सरकार की गलत नीतियों एवं उपेक्षाओं के कारण चीनी मीलें बंद होतीं जा रही हैं वहीं दूसरी ओर नहरों मे पानी न आने से खेतों मे लगी गन्ने की फसल भीषण गर्मी से झुलस रही है।ऐसे मे किसानों के पास एक मात्र विकल्प बचा है भूमिगत जल का, जिसका दोहन व्यापक पैमाने पर पम्पिंग सेटों के माध्यम से हो रहा है किन्तु डीजल की कीमतों मे हुई बेतहाशा वृद्धि ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी है।
जनपद मे नहरों का जाल बिछा होने के बाद भी समय से पानी न आने के कारण किसान परेशान एवं शासन की नीतियों के विरुद्ध लामबंद होने की योजना बना रहे हैं।वर्तमान समय मे किसानों के खेतों मे लगी गन्ने की फसल सूख रही है साथ ही साथ धान की नर्सरी तैयार करने के लिए भी किसानों को पानी की अत्यधिक आवश्यकता है किन्तु नहरों के बेपानी होने के कारण सरकार से क्षुब्ध किसान अब प्रकृति की ओर कातर नजरों से देख रहे हैं।
– कुशीनगर से जटाशंकर प्रजापति की रिपोर्ट

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