जोजरी नदी में औधोगिक प्रदूषित जल से प्रभावित कृषि भूमियों की जांच के लिए पुनः विशेषज्ञों ने किया दौरा

राजस्थान/बाड़मेर- जोधपुर की औधोगिक समूहों के प्रदूषित जल बहाव क्षेत्र में लगातार बंजर हो रही कृषि भूमियों डोली- अराबा क्षेत्र में जोजरी नदी के प्रदूषित जल से हुए भूमि प्रदूषण की स्थिति की जांच एवं उसके उपचार के लिए कृषि विभाग, कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों की संयुक्त समिति ने क्षेत्र का भ्रमण किया। समिति ने डोली, अराबा एवं कल्याणपुर क्षेत्र में पहुंचकर किसानों से संवाद किया तथा प्रदूषित जल के भराव और फसलों की स्थितियां का जायजा लिया। समिति के अध्यक्ष एवं अतिरिक्त निदेशक कृषि विस्तार, जोधपुर खंड जोधपुर गूगनराम मटोरिया के नेतृत्व में टीम ने जोजरी नदी के बहाव क्षेत्र के आसपास के गांवों का दौरा किया।

इस दौरान प्रभावित क्षेत्रों में प्रदूषित जल के भराव की स्थिति, कृषि भूमि एवं फसलों पर पड़ रहे संभावित प्रभाव तथा प्रभावित किसानों की स्थिति के बारे में जानकारी जुटाई गई। समिति में कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के निदेशक अनुसंधान डॉ. मनमोहन सुंदरिय, कृषि विज्ञान केंद्र गुड़ामालानी के प्रभारी डॉ. प्रदीप कुमार पगारिया, क्षेत्रीय निदेशक कृषि अनुसंधान केंद्र मंडोर जोधपुर डॉ. एम.एल. मेहरिया, संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार बालोतरा रूपेश लव्वा, सहायक कृषि अधिकारी कल्याणपुर विजेंद्र गर्ग एवं कृषि पर्यवेक्षक डोली मनोज कुमार शामिल रहे।

समिति द्वारा जोजरी नदी के बहाव क्षेत्र के आसपास औधोगिक समूहों द्वारा छोडा़ गया प्रदूषित जल से प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया जा रहा है। इसके तहत प्रदूषित क्षेत्र के विस्तार एवं प्रभावित किसानों की संख्या का आकलन किया जा रहा है। समिति के सदस्यों ने किसानों से सीधे संवाद कर भूमि की बंजर स्थिति, फसल उत्पादन एवं प्रदूषित जल के भराव से संबंधित जानकारी प्राप्त की। कृषि विभाग की ओर से प्रभावित क्षेत्रों से मिट्टी एवं पानी के नमूने लिए जाएंगे तथा उन्हें आवश्यक जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। प्रयोगशाला से प्राप्त जांच परिणामों के आधार पर भूमि में प्रदूषण की स्थिति का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा। इसके बाद प्रभावित कृषि भूमि के उपचार एवं सुधार के लिए आवश्यक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। समिति द्वारा क्षेत्र में किसानों से सतत संपर्क रखते हुए भूमि एवं फसलों की स्थिति की जानकारी संकलित की जा रही है, ताकि प्रदूषण के संभावित प्रभावों का वैज्ञानिक आधार पर आकलन कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

— राजस्थान से राजूचारण

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