जीवन अनमोल, यूं बेमौत न चुनें मौत

*विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर कार्यक्रम
*छात्र-छात्राओं को मानसिक विकारों के प्रति किया जागरूक
हमीरपुर- विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस पर शनिवार को राठ तहसील के नौरंगा गांव के प्रेम इण्टर कॉलेज में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर छात्र-छात्राओं को मानसिक विकारों के प्रति जागरूक किया गया और साथ ही जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव का कैसे सामना करना है, इसके बारे में महत्वपूर्ण टिप्स दिए गए।
जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित हुए इस कार्यक्रम में जिला अस्पताल के मन:कक्ष की साइको थेरिपिस्ट डॉ.नीता ने कहा कि छात्र जीवन संघर्षों से भरा होता है। कई बार छात्र जीवन में ऐसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं कि निराशा हाथ लगती है और ऐसी अवस्था में बहुत से युवा जीवन को समाप्त कर लेते हैं। कभी भी जीवन में अगर ऐसा समय आता भी है तो उसका डटकर मुकाबला करें। जीवन यूं बर्बाद करने के लिए नहीं मिला है। उन्होंने छात्रों से मोबाइल का कम से कम प्रयोग करने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की अपील की।
डॉ.नीता ने बताया कि मानसिक विकार कई प्रकार के होते हैं। कई बार लोग इन विकारों को ऊपरी चक्कर मानकर उपचार नहीं कराते, जो हानिकार साबित होता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई आपके आसपास भी मानसिक रोग से ग्रसित है तो उसका उपचार कराएं या जिला अस्पताल की हेल्पलाइन नंबर 05282-298180 पर कॉल करें।
नौरंगा सीएचसी के एमओआईसी डॉ.वीर पाल सिंह ने कहा कि युवावस्था बहुत ही संवेदनशील होती है। शोध के अनुसार देश में आत्महत्या के मामलों में सर्वाधिक संख्या 15 से 29 साल के युवा वर्ग की होती है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे बड़ा कारण डिप्रेशन होता है। अभी जो समय चल रहा है, उसमें 10 में से 8 लोग डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। जब बहुत लोग परेशान होते हैं तो वह अपने मन की बात किसी को बताते नहीं है और चेहरे पर हमेशा मुस्कान बनाए रखते हैं। इसके अलावा एकाकीपन भी आत्महत्या का बड़ा कारण है।
इस मौके पर कॉलेज के प्रधानाचार्य शिवम राजपूत, प्रगति गुप्ता, चंद्रकुमार वर्मा, राजकुमार, लालशंकर, महेंद्र राजपूत आदि मौजूद रहे। कॉलेज के छात्र मनीष कुमार, सुनीता देवी आदि का कहना है कि उन्होंने आज के इस कार्यक्रम से मानसिक विकारों के प्रति काफी कुछ जानकारी मिली है, जिसे परिवार में साझा करेंगी और जहां कहीं भी मानसिक विकारों से ग्रसित कोई व्यक्ति मिलेगा तो उसे उपचार कराने को प्रेरित करेंगे।

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