उर्स-ए-ताजुश्शरिया मे अकीदतमंदों की भीड़, दरगाहों पर चादरपोशी, मजहबी नारों से गूंज उठी दरगाह

बरेली। सुन्नी बरेलवी मसलक के सबसे बड़े धर्मगुरू और आला हजरत खादान के सदस्य रहे ताजुश्शरिया मुफ्ती अख्तर रजा खां उर्फ अजहरी मियां के उर्स मे पूरे शहर में अकीदतमंदों की भीड़ नजर आ रही है। शाम को कुल की रस्म अदा की। उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश की जाएगी। दरगाह आला हजरत, दरगाह ताजुश्शरिया और मथुरापुर स्थित इस्लामिक स्टडी सेंटर में कुल की रस्म अदा होगी। शहर के चारों तरफ ताजुश्शरिया के नारों की गूंज सुनाई दे रही है। दरगाह की गली और मथुरापुर स्थित इस्लामिक स्टडी सेंटर पर गुरुवार को कुल से पहले नजारा देखने लायक था। सड़कों पर हजारों की तादाद में लोग दिखाई दे रहे है। शाम को कुल की रस्म शुरू होगी। उर्स के प्रोग्राम में उलेमा ने सूफी विचारधारा को अपनाने, दुनिया में शातिं के प्रयास, खानकाह, मजार और दरगाहों और मसलके आला हजरत से मजबूती के साथ जुड़ने का संदेश दिया। कौर कमेटी के सदस्य शमीम अहमद ने बताया कि कुरान की तिलावत, मीलाद-ए-पाक और नात ओ-मनवकत का नजराना पेश करने के बाद तमाम कार्यक्रम हुए। देश विदेश से आए उलेमा ने जायरीन को खिताब करते हुए आला हजरत के जीवन पर रोशनी डाली। इससे पहले शहर के अलग-अलग इलाकों से परचमी जुलूस निकाला गया। जमात रजा मुस्तफा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व उर्स प्रभारी सलमान हसन खान और राष्ट्रीय महासचिव फरमान हसन खान की कयादत में जुलूस दरगाह शरीफ पहुंचा। कोहाड़ापीर से सैयद फैजी रजा, पुराना शहर से समरान खान और आजमनगर से मोहम्मद साजिद रजा की ओर से परचमी जुलूस निकाला गया। ये तीनों जुलूस सैकड़ों अकीदतमंदों के साथ कदीमी रास्तों से होते हुए बिहारीपुर ढाल पहुंचे। वहां से तीनों जुलूस एक साथ दरगाह शरीफ पहुंचे। वहां लोगों ने जुलूस का स्वागत किया और परचम कुशाई की रस्म अदा की गई। जुलूस में मोइन खान, अब्दुल्ला रजा खां, शईबुद्दीन, रेहान रजा खां, कौसल अली आदि मौजूद रहे। इससे पहले खानकाह ताजुश्शरिया पर कुरान ख्वानी हुई। नात-ओ-मनकबत का नजराना पेश किया गया। फातेहा और दुआ की गई। दीन के रास्ते पर चलने और शरई एतबार से जिंदगी गुजारने की ताकीद की। इसमें अल्लामा जियाउल मुस्तफा, मौलाना शकील, मुफ्ती शहजाद, मौलाना जाहिद, मुफ्ती नश्तर फारूकी ने तकरीर की। इसके बाद असजद मियां ने मुल्क की खुशहाली के लिए दुआ की।।

बरेली से कपिल यादव

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