अजमेर हज़रत मोईनुद्दीन हसन चिश्ती के पीरज़ादा मोहम्मद नाज़िम हुसैन ने दिया इस्तीफा

अजमेर स्थित विश्वविख्यात सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह के नाजिम रिटायर्ड आईएएस आईबी पीरजादा ने अचानक दरगाह कमेटी के नाजिम पद से इस्तीफा दे दिया है। पीरजादा का इस्तीफा इसलिए भी मायने रखता है कि पीरजादा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के गृह राज्य गुजरात के हैं। गुजरात का होने की वजह से ही पीरजादा को 60 वर्ष की उम्र होने के बाद भी दरगाह कमेटी का नाजिम नियुक्त किया गया। जबकि कमेटी के प्रावधानों में 60 वर्ष से अधिक की उम्र वाला व्यक्ति नाजिम नहीं बन सकता है। एक वर्ष पहले पीरजादा ने बड़े उत्साह के साथ नाजिम का पद ग्रहण किया था। नाजिम कमेटी के सदस्यों और दरगाह के खादिमों के साथ तालमेल बैठाकर जायरीन की सुविधा के लिए कार्य भी कर रहे थे। जिला प्रशासन भी पीरजादा की कार्यप्रणाली से संतुष्ट था। लेकिन पिछले दिनों दरगाह के दीवान जैनुल आबेदीन के सोलह खम्बा क्षेत्र के सार्वजनिक शौचालयों के विवाद से न चाहते हुए भी नाजिम पीरजादा उलझ गए। हालांकि शौचालय की भूमि दरगाह कमेटी की है। लेकिन दबाव की वजह से पीरजादा को दीवान के साथ समझौता करना पड़ा। इस एमओयू में यह स्वीकार किया गया कि प्रथम तल पर दरगाह दीवान का आॅफिस और ऊपर सार्वजनिक शौचालय बनेंगे। हालांकि यह समझौता पूरी तरह गैरकानूनी माना गया। इसलिए इस समझौते को एक जनहित याचिका के जरिए हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट में याचिका पर संज्ञान लेते हुए नाजिम सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिए हैं। इसी प्रकार दरगाह की अंतरिक व्यवस्थाओं को लेकर लखनऊ स्थित हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लिया है। पीरजादा साफ-सुथरी छवि के अधिकारी रहे हैं। ऐसे में वह दरगाह कमेटी के नाजिम रहकर किसी कानूनी पचड़े में पढ़ना नहीं चाहते। यही वजह रही कि उन्होंने नाजिम पद से इस्तीफा दे दिया।
नए नाजिम की तलाशः
दरगाह कमेटी में नए नाजिम की नियुक्ति के लिए केन्द्र सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। केन्द्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्रालय के उपसचिव निजामुद्दीन की ओर से जारी विज्ञापन में पात्र व्यक्तियों से नाजिम पद के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इसमें केन्द्र और राज्य सरकार के साथ-साथ सरकारी उपक्रमोें में कार्यरत उपसचिव या निदेशक व समकक्ष अथवा सेवानिवृत्त अधिकारी आवेदन कर सकते हैं। आवेदनकर्ता हनफी मुसलमान और ख्वाजा साहब के प्रति आस्था रखने वाला भारतीय नागरिक होना चाहिए। आवेदक को विश्वविद्यालय से स्नातक और उर्दू कार्य साधक ज्ञान होना जरूरी है। 55 वर्ष तक की उम्र वाला व्यक्ति आवेदन कर सकता है।
अंतिम विकल्प से सैय्यद दानिश की रिपोर्ट

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