बरेली। शहर के वार्ड-64 सिकलापुर में छह साल में कैंसर 12 जिंदगियां निकल चुका है। पांच मरीज ऐसे भी मिले, जिनका या तो इलाज चल रहा है या फिर वे इस गंभीर बीमारी को मात दे चुके हैं। इनमें क्षेत्रीय पार्षद जय प्रकाश राजपूत की बहन भी शामिल हैं। ये वे मामले हैं जो अमर उजाला की पड़ताल में सामने आए। इसकी जानकारी अफसरों को भी है, लेकिन सात माह से कार्रवाई के नाम पर सिर्फ जांच ही चल रही है। क्षेत्र में न तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई शिविर लगाया गया, न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने इसका कारण जानने की कोशिश की। एक परिवार तो ऐसा भी सामने आया, जिसके दो सदस्यों ने कैंसर की चपेट में आकर दम तोड़ दिया। सिकलापुर में अफसरों की लापरवाही के साथ साफ-सफाई के प्रति लोगों में जागरूकता की कमी भी नजर आई। लोगों ने बची खाद्य सामग्री घर के सामने ही फेंक रखी थी, जिसे जानवर फैलाते नजर आए। पानी की लाइनें कई जगहों पर नाली के अंदर से होकर गुजर रही थीं। कुछ जगहों पर तो नाली में ही बाल्टी रखकर लोग पानी भरते नजर आए। कारण जानने पर पता चला कि पानी की मुख्य लाइन सड़क के दूसरी तरफ है। रोड का जब निर्माण हुआ तो कनेक्शन नहीं जुड़वाए गए। बाद में कनेक्शन हुए तो पाइप नाली के भीतर से निकालना पड़ा। लीकेज के कारण दूषित पानी घरों तक पहुंच रहा है। क्षेत्र में गलियां भी काफी संकरी मिली। कई जगह तो चौड़ाई तीन फीट के करीब ही है। क्षेत्र में स्प्रे गन से फर्नीचर की पॉलिश का भी काम होता है। लोग इससे भी परेशान नजर आए। क्षेत्र की तंग गली में रहने वाली तुलसा (50) का अभी 22 अप्रैल को एक मेडिकल कॉलेज में ब्रेस्ट कैंसर का ऑपरेशन हुआ है। बेटा एक निजी कंपनी में कार्यरत है, जिस कारण एम्प्लॉइज स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (ईएसआईसी) के कार्ड की सुविधा मिली। पूरा खर्च उसी से हुआ। तुलसा के मुताबिक, यदि कार्ड न होता तो इलाज कराना संभव नहीं था। पति हृदयरोगी हैं। दो बेटे ही परिवार का सहारा है। क्षेत्रीय पार्षद की बहन अबिता (35) तीन साल पहले इस घातक बीमारी की चपेट में आईं। उन्हें ब्रेस्ट कैंसर हुआ। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए इलाज के लिए सोशल मीडिया पर अपील करनी पड़ी। तत्कालीन डीएम शिवाकांत द्विवेदी की मदद से एम्स में 11 अगस्त 2023 को ऑपरेशन हुआ। बाद में आयुष्मान कार्ड भी बन गया। अभी कीमो के लिए झज्जर जाना पड़ता है। इसके लिए रेलवे पास मिला हुआ है। आजमनगर के पवन (40) जीभ के कैंसर की चपेट में आए थे। वर्ष 2021 में पुष्टि के बाद शहर के अलग-अलग डॉक्टर को दिखाया। ऑपरेशन का खर्च चार लाख रुपये बताया गया। फास्ट फूड का ठेला लगाने वाले पवन ने पत्नी के जेवर गिरवी रखे। कुछ रुपये उधार भी लेने पड़े। झज्जर (हरियाणा) स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान में इलाज हुआ। पवन का कहना है कि फिलहाल वह इस बीमारी से ऊबर चुके है। क्षेत्र के नरेश पाल (62) चाय का ठेला लगाते हैं। ये भी कैंसर की चपेट में आए। पत्नी के जेवर बेचकर और कर्ज लेकर लखनऊ के एसजीपीजीआई में इलाज कराया। करीब ढाई लाख रुपये खर्च हुए। इलाज में जो कर्ज चढ़ा, उसे अब तक चुका रहे हैं। नरेश का कहना है कि यदि आयुष्मान कार्ड होता तो उन्हें कर्ज न लेना पड़ता। इसी तरह, क्षेत्र की वंदना जायसवाल तीन साल से (59) ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित है। वरिष्ठ कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. आरके चितलांगिया ने बताया कि जैसे कैंसर अलग-अलग तरह का होता है वैसे उसके होने के कारण भी अलग-अलग होते हैं। दूषित पानी से लिवर, तंबाकू गुटखा से लंग्स, स्प्रे गन से सांस से जुड़ी समस्याएं हो सकती है। सिकलापुर में अलग-अलग तरह के केस हैं। इसलिए वहां मेडिकल जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी। वैसे भी इस समय कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं।।
बरेली से कपिल यादव
