27 सालों बाद आखिरकार ANTF के हत्थे चढ़ा फरार इनामी आरोपी

बाड़मेर/राजस्थान- मारवाड़ी में एक कहावत है की पुलिस चाहे तो अपराधियों को सात समुन्द्र पार से पकड़ कर भी ला सकतीं है चाहे अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो उसे ये नहीं मालूम था कि विकास कुमार की टीम से पाला पड़ा और दे दिया जेल की सलाखों के पीछे, नशीले पदार्थों के आकाओं को कच्चे माल की सप्लाई करने वाले चालाकी धरी की धरी रह गई।

विकास कुमार ने बताया कि एएनटीएफ टीम नशे के सौदागरों को पकड़ने के लिए अहमदाबाद गई। लेकिन टीम को 27 साल से फरार लाखों रुपए की ठगी करने वाले आरोपी को हत्थे चढ़ गया। ठग पर तीन जिलों में 26 हजार रुपए का इनाम है। मुकदमा दर्ज होने पर बाड़मेर छोड़कर पहले जयपुर, दिल्ली और अहमदाबाद में फरारी काटी। अपनी पहचान छुपाने के लिए नाम भी बदल दिया‌।
एएनटीएफ ने फ्लेक्सी बैनर छपवाने के बहाने उसकी प्रिंटिंग प्रेस पर पहुंची, रेट को लेकर नौकरों से बहस की, फिर ठग बाहर आने पर हुलिया फोटो से मिलाकर कर दबोच लिया। फिलहाल एएनटीएफ की टीम रिकॉर्ड खंगाल रही है कि इसके खिलाफ कितने मामले है, कितने रुपए की ठगी की है।

आईजी विकास कुमार ने बताया की बाड़मेर निवासी हेमराज और मनोज दोनों भाईयों ने 1994 में फर्जीवाड़ा करने के लिए निवेश कंपनी शुरू की थी और ब्रांच पर ब्रांच खोलते गए। सैकड़ों निवेशकों को रुपए डबल करने का लालच दिया। पांच बाद साल 1999 में पहला मुकदमा उनके खिलाफ दर्ज होने पर सारा रुपए खाकर रफू चक्कर हो गए और उसके बाद बाड़मेर से गायब हो गए। इन सत्ताईस सालों में जयपुर, दिल्ली और गुजरात के अहमदाबाद में फरारी काटी।

आरोपी पर निवेशकों का पैसा खा जाने के कई मामले दर्ज है। एएनटीएफ पूरे रिकॉर्ड को खंगाल रही है। मनोज (54) पुत्र हरीश निवासी आजाद चौक बाड़मेर हाल, नव रचना सोसायटी, आनंदवाड़ी ईशनपुर अहमदाबाद के खिलाफ बाड़मेर, बालोतरा और जालोर जिले में मुकदमें दर्ज है। इस पर 26 हजार रुपए का इनाम है वहीं बड़े भाई हेमराज की कोरोना से 2021 में मौत हो गई थी। दोनों बराबर के ही पार्टनर थे। आरोपी मनोज अहमदाबाद में नाम बदलकर अपना कारोबार कर रहा था। बाड़मेर में निवेश कंपनी का धंधा छोडकर अहमदाबाद में प्रिंटिग प्रेस का काम शुरू किया। नाम बदलकर कुमार ब्रदर्स रख लिया चालाक इतना की अपने बाड़मेर वाले रिश्तेदारों से नाता तोड़ दिया।

विकास कुमार ने बताया कि एएनटीएफ के पास सूचना थी कि पश्चिमी राजस्थान में दर्जनों अवैध रूप से संचालित ड्रग्स फैक्ट्रियों के लिए कच्चा माल और कैमिकल गुजरात के अहमदाबाद से भेजा जा रहा है और इसमें कुछ राजस्थान के लोग शामिल है। लंबे समय तक टीम ने गुजरात के अलग-अलग इलाकों में घूमती रही। टीम को सूचना मिली कि बाड़मेर के निवासी दो भाई लंबे समय से अहमदाबाद में फर्जी नाम से रह रहे है। तरह-तरह के संदिग्ध धंधे करके खूब पैसा कमा रहे है टीम के पड़ताल करने पर यह जानकारी लगी कि 1999 से ही पुलिस से फरार चल रहे है। लेकिन बड़े भाई की कोरोना काल में डेथ हो गई।

एएनटीएफ के विकास कुमार ने बताया कि रिकॉर्ड की छानबिन से पता चला कि मनोज और उसका बड़ा भाई हेमराज दोनों ही 1999 से पुलिस से फरार चल रहे है। दोनों भाईयों ने 1994 में फाइनेंस कंपनी चलाकर सैकड़ों लोगों से लाखों करोड़ों रुपए हड़प लिए। एएनटीएफ टीम को सूचना मिली थी कि आरोपी अपनी पहचान छुपाकर अनजान लोगों से बात नहीं करता है। ऐसे में टीम सादे कपड़ों में फ्लेक्सी के बनवाने कस्टमर बनकर पहुंची जब आरोपी नजर नहीं आया तो टीम ने नौकरों से रेट को लेकर बहसबाजी शुरू की और मालिक बुलाने की बात कही। हंगामा होते देख मनोज खत्री स्वंय आ गया। रेट के विवाद को सुलझाने की कोशिश की। इस दौरान टीम ने फोटो से उसके चेहरे का मिलान कर पकड़ लिया।

विकास कुमार ने बताया कि आरोपी मनोज ने 1992 में बाड़मेर शहर के स्टेशन रोड पर कैरियर सेविग्स एंड इन्वेस्टर इंडिया लिमिटेड नाम से एक कंपनी खोली। आरोपी लोगों को रुपए डबल करने का लालच दिया। आरोपी के पास रुपए जमा कराने लगे।आरोपी मनोज ने अच्छा मुनाफा होता देख कंपनी की धीरे-धीरे करते 16 ब्रांच और खोल दी अपने भाई हेमराज को भी कंपनी में पार्टनर बना दिया आरोपी को बाजार में और भी कंपनी टक्कर देने लगी तो मनोज को घाटा लगने लगा आरोपी व उसका भाई हेमाराम लोगों के रुपए लेकर पूरे परिवार के साथ फरार हो गए। इन पर मुकदमें दर्ज हुए। फरारी के दौरान जयपुर तो कभी दिल्ली रहे, उसके बाद अहमदाबाद में किराए का मकान लिया। पांच साल प्रिंटिंग के कार्य की मजदूरी की। फिर खुद की डोटकोम बिंडर व कुमार इंफो के नाम से प्रिटिंग प्रेस खोली। खुद का घर भी खरीद लिया। आरोपी मनोज को अहमदाबाद में कुमार के नाम से लोग जानते थे।

— राजस्थान से राजूचारण

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