राजस्थान/बाड़मेर- कहते हैं बडे़ बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलने से युवाओं की जिंदगी खुशहाल होती है लेकिन आजकल की युवा पीढ़ी द्वारा बुजुर्गों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है इसका लेखा जोखा आपके सामने है।
देश की सबसे बड़ी बैंकों में शामिल एक बैंक के भीतर आधुनिक युग वाली मशीनें चलती रहीं, फाइलें कम्प्यूटर पर अगुली द्वारा माऊस पर पलटती रहीं, ऑडिट की औपचारिकताएं पूरी होती रहीं…लेकिन बाहर पचास डिग्री सेल्सियस तापमान में तपती धूप और झुलसा देने वाली गर्मी में एक बुजुर्ग महिला नई पासबुक की आस लिए जमीन पर बेसहारा महिला पड़ी रही।बाड़मेर के बायतु मुख्यालय पर स्थित एसबीआई शाखा में उस दिन सिर्फ बैंक का सिस्टम ही डाउन नहीं था, बल्कि बैंक में नियुक्त कर्मचारियों की इंसानियत, संवेदनाएं और जिम्मेदारियों का सर्वर भी पूरी तरह ठप नजर आया।जिस उम्र में किसी मां को सहारे और सम्मान की जरूरत होती है, उस उम्र में वह बैंक के बाहर धूल भरी जमीन पर इंतजार करने को मजबूर रही।अंदर कागजों में लाखों करोड़ों रूपयों का हिसाब होता रहा, बाहर इंसानियत का घाटा बढ़ता रहा।यह तस्वीर सिर्फ एक बुजुर्ग महिला की नहीं, बल्कि उस संवेदनहीन व्यवस्था की है जहां प्रक्रियाएं इंसानों से बड़ी हो गई हैं। देश के सबसे बड़े बैंक के कार्मिकों से इस तरह की संवेदनहीनता की उम्मीद कतई नही थी।
— राजस्थान से राजूचारण
