राजस्थान/बाड़मेर- देवभूमि उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित श्री चारण गढवी सेवा सदन चारण समाज के लोगों को पुनः एकजुटता लाने के साथ ही चारणाचार की भावना से युवा पीढ़ी को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रहीं है इसमें कोई शक सुबहा नहीं है देश के किसी भी राज्य और विदेशी धरती से कोई भी चारण समाज का व्यक्ति पहले अपने परिजनों की अस्थियाँ माँ गंगाजी में पूजा अर्चना करते हुए विसर्जन करने आया करते थे उस दौरान हरिद्वार की धरती पर अपने चारण समाज का कोई धर्मशाला वगैरह नहीं थी और आजकल बहु मंजिला आधुनिक विशाल भवन जहाँ पर चारणाचार की अपणायत रो अनूठा हैत देखकर खुशी होती है, आजकल दुनिया में शिक्षा का महत्व सबसे ज्यादा हो गया है लेकिन जिदंगी के अन्तिम पड़ाव मे मोक्ष प्राप्त करने के लिए देवाधिदेव महादेव की जटा से निकलीं माँ गंगाजी में अपनों की अस्थियाँ विसर्जित कर मोक्ष प्राप्त करते हैं तभी उनके परिजनों का जीवन धन्य होता है।
शक्ति कुजं हरिद्वार के श्याम सिंह बारहठ खिनावड़ी, इन्द्र दान लालस जुड़िया ने बताया कि समस्त चारण गढवी समाज को अत्यंत हर्ष के साथ ही खुशी होती है कि श्री करणी मां सोनल मां व लूंग मां की कृपा से श्री चारण गढवी सेवा सदन हरिद्वार चारण गढवी धर्मशाला में 12616 वर्ग फ़ुट के भूखण्ड पर निर्मित अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त लगभग पाचं दर्जन कमरे, दो लिफ्ट एक कथा वाचन हेतु बड़ा हाल सहित भोजनशाला व एक माँ करणी जी के मंदिर का निर्माण किया गया था और भवन के चारों तरफ़ जोधपुर के लाल पत्थरों के एलिवेशन से निर्मित इस पंच मंज़िला भवन आपके लिए घर जैसा माहौल में बना हुआ है।
शक्ति कुजं में मिले सज्जन सिंह कविया बिराई ने कहा कि आजकल युवा पीढ़ी और बुजुर्गों द्वारा अपने परिवारिक सदस्यों को साथ लेकर अधिकमास में माँ गंगा मईया हरिद्वार और ऋषिकेश के साथ ही देवभूमि उत्तराखंड के पर्यटन स्थलों का आनंद लेने में यहाँ पर अधिक संख्या में आ रहें हैं।विशेष रूप से राजस्थान से आने वाले चारण समाज के लोगों को यहाँ पर घर जैसा माहौल मिलता है और सभी मिलकर चारणाचार की भावना को पुनः स्थापित करने की छोटी सी कोशिश रहे हैं एक दिन सफलता जरूर मिलेगी।
— राजस्थान से राजूचारण
