पार्टीबंदी में कैद इमामबाड़ा, दस साल से नहीं खुला ताला

वक्फ बोर्ड में लंबित है विवाद, हाईकोर्ट ने छह माह में निस्तारण के दिए निर्देश

बरेली। किला थाना क्षेत्र के मलकपुरा स्थित इमामबाड़ा खलील खां पर पिछले करीब दस वर्षों से ताला पड़ा है। इमामबाड़े में ताले को लेकर दो पक्षों के बीच चला आ रहा विवाद अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। मामला सुन्नी वक्फ बोर्ड में दर्ज वक्फ संख्या 2092 से संबंधित बताया जा रहा है।

इमामबाड़ा खलील खां को पुश्तैनी आस्ताने-अहल-ए-खैर के रूप में दफा 37 में दर्ज बताया गया है। मंगलवार को आसिफ नूर ने अपने निवास पर प्रेस वार्ता कर मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह इमामबाड़े में लगातार धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करते रहे हैं।

आसिफ नूर ने आरोप लगाया कि नसीम और रेहान ने इमामबाड़े में ताले लगा रखे हैं। इससे अकीदतमंदों की आवाजाही और धार्मिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। ताला खोलने को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है।

मामला सुन्नी वक्फ बोर्ड में लंबित है और अभी तक इसका अंतिम निस्तारण नहीं हो सका है। आसिफ नूर ने इसी मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। उनके अनुसार, हाईकोर्ट ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को छह माह के भीतर मामले का निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं।

प्रेस वार्ता में आसिफ नूर ने वक्फ बोर्ड से संबंधित दस्तावेजों के साथ हाईकोर्ट के आदेश की प्रति भी पत्रकारों को दिखाई। उन्होंने मांग की कि इमामबाड़े का ताला खोला जाए, जिससे अकीदतमंद वहां इबादत, नज़र-नियाज़ और अन्य धार्मिक रस्में अदा कर सकें।

हालांकि, मामले में दूसरे पक्ष का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया मिलने के बाद ही विवाद से जुड़े सभी पहलुओं की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

— बरेली से तकी रजा

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