कैबिनेट मंत्री के बेटे के निरामया अस्पताल मे युवक की मौत, चार घंटे हंगामा, इलाज में लापरवाही का लगाया आरोप

आंवला, बरेली। आंवला में पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह के बेटे डॉ. दुष्यंत सिंह के निरामया मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में सड़क हादसे में घायल 23 वर्षीय मनोज की उपचार के दौरान मौत के बाद शनिवार को जमकर हंगामा हुआ। परिजनों ने इलाज में लापरवाही और गंभीर हालत के बावजूद समय पर रेफर नहीं करने का आरोप लगाया। करीब चार घंटे तक परिजन अस्पताल में डटे रहे और पशुधन मंत्री को मौके पर बुलाने की मांग करते रहे। रात करीब आठ बजे अस्पताल के एमडी डॉ. दुष्यंत सिंह पहुंचे और हरसंभव मदद का आश्वासन दिया। जिसके बाद परिजन शांत हुए। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार किया है। रिश्तेदार यादराम के मुताबिक, आंवला-भमोरा मार्ग पर रमनगला गांव के पास शनिवार दोपहर करीब एक बजे टैंकर की चपेट में आने से बाइक सवार भूरी देवी (65) की मौके पर मौत हो गई थी। प्रेमराजपुर निवासी भूरी देवी अपने धेवते मनोज के साथ बाइक से गई थीं। हादसे में मनोज गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे रेलवे स्टेशन रोड स्थित निरामया मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों का आरोप है कि मनोज की हालत लगातार बिगड़ रही थी। इसके बावजूद उसे समय रहते उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर नहीं किया गया। रिश्तेदार यादराम का कहना है कि परिवार ने कई बार रेफर करने के लिए कहा। बाद में अस्पताल प्रबंधन तैयार हुआ तो कागजी प्रक्रिया में काफी समय लग गया। इसी दौरान मनोज ने दम तोड़ दिया। युवक की मौत होते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया। शाम करीब चार बजे शुरू हुआ हंगामा रात आठ बजे तक चलता रहा। सूचना मिलने पर पुलिस भी अस्पताल पहुंची और परिजनों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह को बुलाने की मांग पर अड़े रहे। रात करीब आठ बजे मंत्री के बेटे एवं अस्पताल के एमडी डॉ. दुष्यंत सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया, जिसके बाद मामला शांत हुआ। इस दौरान मनोज का शव अस्पताल परिसर में खड़ी एंबुलेंस में रखा रहा। रात करीब साढ़े आठ बजे पुलिस ने शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। सीओ आंवला हेमंत उपाध्याय ने बताया कि दोनों शव पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिए गए हैं। टैंकर को थाने में खड़ा कराया गया है और फरार चालक की तलाश की जा रही है। अस्पताल में हंगामे की सूचना मिलने पर पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची थी। निरामया मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के एमडी डॉ. दुष्यंत सिंह ने परिजनों के आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि हादसे में मनोज के सिर में गंभीर चोटें आई थीं और उपचार के दौरान उसके करीब 45 टांके लगाए गए थे। डॉ. सिंह के मुताबिक, परिजन युवक को डिस्चार्ज कराने की मांग कर रहे थे और उनकी जिद पर डिस्चार्ज किया गया। अस्पताल प्रबंधन ने उपचार में लापरवाही से इनकार किया है।।

बरेली से कपिल यादव

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