बरेली। सेटेलाइट बस अड्डे पर फल के ठेले के नीचे कपड़े में लिपटा मिला दो माह का मासूम आखिर किसका है, इसका पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर पता लगा लिया। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस हरदोई के माधौगंज थाना क्षेत्र तक पहुंची और बच्चे के माता-पिता को खोज निकाला। पूछताछ में दंपती ने बच्चे की पहचान करते हुए स्वीकार किया कि वह गंभीर बीमारी से पीड़ित है और उसे बार-बार दौरे पड़ते हैं। आर्थिक तंगी के कारण इलाज न करा पाने की मजबूरी में उन्होंने उसे बस अड्डे पर छोड़ दिया था। शहर के सेटेलाइट बस स्टैंड पर तीन माह के बच्चे अभिनय को छोड़कर गए माता-पिता स्वाति और ओमकार की ममता अब जागृत हुई है। बाल कल्याण समिति ने मां स्वाति को बच्चे के साथ रहने की अनुमति दे दी है। सोमवार को बच्चे को दौरा पड़ने के कारण दत्तक ग्रहण एजेंसी ने मासूम को फिर जिला अस्पताल के एनआरसीयू वार्ड मे भर्ती करा दिया। हरदोई के माधौगंज थाना क्षेत्र निवासी स्वाति ने बताया कि तीन माह पहले उनके दो जुड़वां बच्चे हुए थे। उनमें से एक की मृत्यु गर्भ में ही हो गई थी। दूसरा बेटा बच गया, जिसका नाम धैर्य रखा गया। कुछ दिन मायके जाने के बाद जब वह लौटी तो बच्चे को दौरे पड़ने लगे। आठ दिन पहले उन्हें इसकी जानकारी हुई, जिसके बाद वे इलाज के लिए बरेली आए। स्वाति के अनुसार, शनिवार रात को जब बच्चे को दौरा पड़ा और वह ऐंठ गया। उसका शरीर ठंडा पड़ा गया। उसे लगा कि बच्चा मर गया है। इसके बाद रात मे वे बच्चे को मजबूरन ठेले के नीचे रखकर चले गए। लोगों की सूचना पर चौकी प्रभारी मयंक भारद्वाज ने बच्चे को 108 एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल भिजवाया था। उपचार के बाद बच्चे को चाइल्डलाइन के सुपुर्द कर दिया गया। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दिनेश चंद्र ने बताया कि दंपती ने बताया है कि बच्चे का जन्म क्वीन मेरी अस्पताल लखनऊ मे हुआ था। उन्होंने कुछ कागजात भी दिखाए है। हालांकि उनकी तरफ से गवाह पूरे नही होने के कारण बच्चे को अभी माता-पिता को नही सौंपा गया है। समिति ने उन्हें बुधवार तक का समय दिया है। यदि वे गवाह ले आते है तो बच्चा उन्हें सौंप दिया जाएगा। एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि बच्चे के माता-पिता की पहचान कर ली गई है। मामले में आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। बच्चे के भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय बाल कल्याण समिति के निर्देशानुसार लिया जाएगा।।
बरेली से कपिल यादव
