बरेली। शहर की सफाई व्यवस्था एक बार फिर संकट में पड़ गई है। डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन का कार्य पूरी तरह ठप होने से कॉलोनियों, बाजारों और मुख्य सड़कों पर कचरे के ढेर लगने लगे हैं। स्थिति तब बिगड़ गई जब छह संविदा कर्मचारियों पर मुकदमा दर्ज होने से नाराज सफाईकर्मी काम छोड़कर सड़क पर उतर आए और विरोध स्वरूप कूड़ा सड़क पर फेंक दिया। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें निर्धारित मानदेय नहीं दिया जा रहा। उनका कहना है कि सरकारी मानकों के अनुसार उन्हें करीब 13 हजार रुपये वेतन मिलना चाहिए, जबकि ठेकेदार केवल 7500 रुपये का भुगतान कर रहा है। इसी के विरोध में कर्मचारियों ने आंदोलन शुरू कर दिया। दूसरे दिन भी नही उठा कूड़ा हड़ताल के चलते लगातार दूसरे दिन भी घर-घर से कूड़ा नहीं उठ सका। कई इलाकों में कूड़ेदान भर गए और सड़कों के किनारे कचरा जमा होने लगा। इससे लोगों को दुर्गंध और गंदगी की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। आर-पार की लड़ाई के मूड में कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने साफ कहा है कि जब तक मुकदमा वापस नहीं लिया जाता और वेतन संबंधी मांगों पर समाधान नही निकलता, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। जिलाध्यक्ष आशीष कुमार वाल्मीकि ने कहा कि उनकी मांग है कि शासनादेश के आधार पर वेतन दिया जाए। इस संबंध में कई बार नगरायुक्त को ज्ञापन दे चुके हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि निगम ठेकेदारों की गोद में बैठ गया है। हमारी कोई सुनने को तैयार नहीं है। अब सफाईकर्मियों पर एफआईआर दर्ज की गई है। हमारी तरफ से भी तहरीर दी गई है, लेकिन शिकायत दर्ज नहीं हुई। हमारी यही मांग है कि हमारी एफआईआर दर्ज की जाए और वेतन का मुद्दा सुलझाया जाएगा। जब तक ये नहीं होगा शहर में सफाई का काम ठप रहेगा।।
बरेली से कपिल यादव
