भोजीपुरा, बरेली। प्रशासन का दावा है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करके भोजीपुरा स्थित पिपरिया गांव में विपक्षियों ने सरकारी जमीन पर अस्थायी मस्जिद बना रखी थी। ईटो की पक्की दीवार पर टिनशेड डाल रखा था। जहां पर गांव के लोग नमाज अदा कर रहे थे। 23 साल की लंबी न्यायिक लड़ाई के बाद विपक्षियों के कोर्ट से मुकदमा हारने के बाद सदर प्रशासन की टीम ने आखिरकार शनिवार को भोजीपुरा स्थित घंघौरा पिपरिया गांव की मस्जिद पर सदर तहसील प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान गांव मे खलबली मची रही। पुलिस-पीएसी बल को देख कोई मौके पर कार्रवाई का विरोध भी नही जता सका। घंटे भर में मस्जिद धराशाई हो गई। कार्रवाई शुरू करने से पहले गांव में करीब 300 वर्गगज मे बनी मस्जिद को गिराने के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सीओ हाईवे के नेतृत्व में कई थानों की फोर्स और पीएसी के जवानों ने पूरे इलाके को घेरे रखा था। मौके पर एसडीएम सदर प्रमोद कुमार और तहसीलदार भानु प्रताप सिंह भी डटे रहे। गांव में विपक्षियों में सरकारी जमीन पर अस्थाई मस्जिद बना रखी थी। ईंटों की पक्की दीवार पर टिनशेड डाल रखा था। दोपहर करीब 12 बजे से शुरू हुई बुलडोजर की कार्रवाई में एक घंटे में अवैध निर्माण जमीदोंज हो गया। फिर उसके मलबे को भी प्रशासन ने बुलडोजर से हटाया। तहसील प्रशासन का दावा है कि मस्जिद राजस्व अभिलेखों में गाटा-1474ख पर श्रेणी-5 की सरकारी बंजर भूमि पर बनी थी। कोर्ट के आदेश पर अवैध ढांचे को ध्वस्त कर सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया है। इस भूमि को लेकर कानूनी विवाद 23 साल से चल रहा था। कार्रवाई के दौरान एसडीएम ने बताया कि बेदखली की प्रक्रिया के तहत कब्जा करने वाले पक्ष से जुर्माना वसूल किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि तहसीलदार सदर न्यायालय ने प्रतिवादी मोहम्मद बक्श और मुशर्रफ पर 272 रुपये का जुर्माना और 10 रुपये निष्पादन शुल्क भी लगाया था। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए एसडीएम ने तहसीलदार सदर समेत 10 लोगों की टीम गठित की थी। इसमें तहसीलदार भानु प्रताप सिंह, नायब तहसीलदार रिठौरा विदित कुमार व भोजीपुरा के अभिषेक तिवारी व राजस्व निरीक्षक हरि प्रकाश गंगवार एवं जगदीश गंगवार शामिल रहे। साथ ही पांच लेखपाल सौरभ चौहान, राजीव कुमार, महेंद्र पाल, सौरभ कुमार और मोहम्मद इरफान भी टीम मे रहे। एसडीएम सदर प्रमोद कुमार ने बताया कि गाटा-1474ख की जमीन पर अवैध कब्जा कर मस्जिद बनाई गई थी। यह जमीन राजस्व अभिलेखों में श्रेणी-पांच बंजर भूमि के नाम से दर्ज है। वर्ष 2008 से इस जमीन मामले में आरोपियों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ था। तहसीलदार सदर कोर्ट से आरोपियों के विरुद्ध बेदखली का आदेश भी जारी हुआ था। फिर विपक्षी सिविल कोर्ट गए थे, जहां से उनका मुकदमा खारिज हो गया था।।
बरेली से कपिल यादव
