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जल जीवन का आधार: रजनीकांत व्यास

राजस्थान- गर्मियों के मौसम में जहाँ सड़को पर डामर ही आग उगल रहा है इस दौरान ही मानव जीवन की सेवा में कोई भी सगठन, सस्था और व्यक्तियों का समूह मिलकर कोई भी नेक कार्य करते हैं तो उनके इस जीवन में सभी सकट जरूर मिटते है ऐसे हमारे शास्त्र में भी लिखा गया है और आजकल रेल्वे स्टेशन पर सेवा भारती समिति बाड़मेर द्वारा रेल्वे स्टेशन पर रेल्वे अधिकारियों के सहयोग से शीतल जल व्यवस्था की जा रही बड़ा सराहनीय कार्य है ये कहना है वरिष्ठ अधिवक्ता अम्बा लाल जोशी का जिन्होंने आमजन से आव्हान किया है कि आप भी इस पुण्य का बढ़ चढकर लाभ उठावे।

जोशी ने बताया कि हमारे शास्त्रों में ग्रीष्म ऋतु में पानी पिलाने की व्यवस्था करना एक पुनीत और धार्मिक कार्य मानते हैं, आजकल गर्मी बढ़ने के साथ-साथ सभी मूक प्राणियों की पानी की आवश्यकता भी बढ़ने लगती है। प्रायः देखा जाता है कि इस मौसम में लोग जगह-जगह पर प्यास बुझाने के लिए प्याऊ की व्यवस्थाएं करते हैं। प्याऊ द्वारा प्यास बुझाने की प्रक्रिया को भारतीय संस्कृति प्रपा दान कहती है।

भविष्योत्तर पुराण में लिखा गया है कि फाल्गुन मास के बीत जाने पर चैत्र महोत्सव से ग्राम या नगर के बीच में, रास्ते में या वृक्ष के नीचे अर्थात छाया में पानी पिलाने की व्यवस्था की जानी चाहिए‌। सामर्थ्यवान व्यक्ति को चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़ इन चार महीनों में जल पिलाने की व्यवस्था अवश्य करनी चाहिए. यदि कम धन वाला व्यक्ति है, तो उसे तीन पक्ष अर्थात वैशाख शुक्ल पक्ष, ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष व ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष में अवश्य शीतल जल पिलाने की व्यवस्था करनी चाहिए।

स्कंदपुराण के अनुसार तीनों लोकों में जल को जीवन का पर्याय और अमृततुल्य माना गया है, इसलिए पुण्य की कामना वाले लोगों को जल पिलाने की व्यवस्था करनी चाहिए‌। शास्त्रों में प्रत्येक मौसम के अनुरूप दान का अत्यंत महत्त्व बतलाया गया है, जिससे गरीब से गरीब व्यक्ति भी सुखपूर्वक रह सके तथा सामाजिक विकास में सभी की भागीदारी हो सके। सर्दी के मौसम में कंबल का दान, लकड़ी और अग्नि की व्यवस्था, वर्षा ऋतु में छतरी का दान या किसी गरीब व्यक्ति के घर को आच्छादित कराना या घर बनवाकर देना तथा ग्रीष्म ऋतु में जल शीतल जल की व्यवस्था करना, गरीब व्यक्तियों को घड़े का दान करना, सत्तूओ का दान करना अत्यंत श्रेयस्कर बताया गया है. गरुण पुराण तो यहां तक कहता है कि किसी को जल पिलाने के लिए अगर जल खरीदना भी पड़े तो भी उसको यथाशीघ्र जल पिलाना चाहिए ओर आजकल यह सुविधा सभी जगह पर उपलब्ध है।

शास्त्रों के अनुसार-
वसंत ग्रीष्मर्यार्मध्ये यः पानीयं प्रयच्छति।
पले पले सुवर्णस्य फल माप्रोति मानवः।।

अर्थात् बसंत और ग्रीष्म यानी गर्मी के चार महीनों में घड़े के दान, वस्त्र का दान तथा पीने योग्य जल का जो दान करता है, उनको स्वर्ण के दान के बराबर फल प्राप्त होता है. प्यास से व्याकुल व्यक्ति जिस क्षेत्र से होकर गुजरता है, उस क्षेत्र का पुण्य क्षीण हो जाता हैं इसलिए पुण्य की रक्षा हेतु भी प्याऊ की व्यवस्था करनी चाहिए। बहुत से शास्त्रों में जल पिलाने वाले को गोदान का फल प्राप्त करने का अधिकारी माना गया है। गर्मी के दिनों में मंदिरों में भी लोग जल की व्यवस्था करते हैं. जल दान के इस धार्मिक महत्त्व को स्वीकार करते हुए भारत में प्याऊ की परंपरा का लंबे अरसे तक अपना अस्तित्व रहा है।

मारवाड़ में भी जहाँ पानी का अभाव रहता था, पुराने जमाने से ही प्याऊ की परंपरा का खास तौर पर पालन किया जाता है. बड़े आकार के मिट्टी के घड़े जिन्हें “मूंण” कहते हैं (जिसमें एक बार में करीब 50-70 लीटर पानी भरा जा सकता है). कई मूंणे जगह जगहों पर सिरकियों की प्याऊ बनाकर उसमें रेत बिछाकर रखी जाती थी, उन मूंणों को लोग स्वेच्छा से जल स्रोतों से पीतल/ तांबे की चरी या बड़े कलश (लंबी सुराहीदार गर्दन वाले) भरकर जल लाकर भरते थे, और कई लोग पैसा देकर जल भरवाने का पुण्यकाम करते थे. फिर वहाँ प्याऊ पर किसी बुजुर्ग महिला पुरुष या जरूरतमंद या निशक्तजन को बिठाया जाता था जो कि सभी राहगीरों को तांबे के बड़े झारे (लंबी नली वाला पात्र) से जल पिलाकर तृप्त करते थे। कई प्याऊऔ पर राहगीरों को पानी पिलाने से पहले गुड़ के टुकड़े भी खिलाये जाते थे और फिर पानी पिलाया जाता था।

आजकल देश में सबसे ज्यादा पचास डिग्री सेल्सियस तापमान में बाड़मेर जिले का नाम सुर्खियों में है और रेल्वे स्टेशन पर यात्रियों की टिकट चैकिंग कर रहे दिनेश कुमार ने भी रेलयात्रियों को रास्ते में पीने के लिए शीतल जल की बोतलें भरकर साथ रखने की बात कही। जोधपुर रेल्वे अधिकारियों द्वारा रेल्वे स्टेशनों पर शीतल जल की व्यवस्था की गई है और साथ ही हमारे यहाँ पर सेवा भारती समिति बाड़मेर द्वारा रेल्वे स्टेशन पर शीतल जल व्यवस्था रजनीकांत व्यास के नेतृत्व में सेवाभावी जसोदा मोदी, मन्जू सर्राफ, मन्जू सिन्घल, पूनिता बन्सल, मधु सर्राफ, किरण गौयल, अल्पना अग्रवाल, उषा सिघल, अल्का सिघल, सगीता बन्सल, रजनीकांत व्यास, दिलीप लोहिया, पुखराज बोकड़ीया, भरत दवे, विनोद दवे, नारायण जागिड़, सुखदेव सोनी, किशोर भार्गव, अमन दवे, देवराज सारण रमेश वोट, विशाल जैन, तन सिंह, ओमप्रकाश सोनी, चम्पा लाल सोनी, शकर लाल मोदी, राजा राम सर्राफ, शुशील सिघल सहित दर्जनों सेवाभावी रेलगाड़ियों के यात्रियों को शीतल जल को पिलाने के लिए उपस्थित रहें।

– राजस्थान से राजूचारण

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