बरेली। फरीदपुर विधायक डॉ श्याम बिहारी लाल का जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। शाहजहांपुर जिले के गांव सिमराखेड़ा मे जन्मे श्याम बिहारी लाल का बचपन संघर्षों मे बीता। सीमित संसाधनों के बीच उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और एक के बाद एक सीढ़ी चढ़ते हुए दो बार विधायक बने थे। फरीदपुर विधानसभा सीट आरक्षित है। इंटरमीडिएट तक की शिक्षा उन्होंने शाहजहांपुर मे की। लखनऊ के क्रिश्चियन कॉलेज से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। पढ़ाई संग समाज और राजनीति को समझने की ललक ने उन्हें जनसेवा के रास्ते पर आगे बढ़ाया। राजनीति में कदम रखने के बाद संघर्ष का लंबा दौर शुरू हुआ। वर्ष 2005 में बीजेपी की सदस्यता लेने के बाद पार्टी ने 2007 में फरीदपुर विधानसभा से टिकट दिया, लेकिन हार गए। 2012 में भाजपा ने फिर उन्हें टिकट मिला, लेकिन इस बार भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हार नही मानी और जमीन से जुड़े रहकर लोगों के बीच काम किया। यही मेहनत रंग लाई और 2017 में पहली बार फरीदपुर से विधायक चुने गए। समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक स्व. डॉक्टर सियाराम सागर को हराकर चुनाव जीते थे। इसके बाद 2022 में जनता ने फिर उन पर भरोसा जताया और वे दूसरी बार चुन कर विधानसभा पहुंचे थे। इधर, बृहस्पतिवार को ही उन्होंने 1 जनवरी को पूरे उत्साह और सादगी के साथ अपना 60 वां जन्मदिन मनाया था। फेसबुक, इंस्ट्राग्राम आदि सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उन्हें बधाइयां देने वालों का तांता लगा था। उनके असमय निधन से न सिर्फ राजनीति, बल्कि पत्रकारिता और समाजसेवा से जुड़े लोग भी गहरे सदमे मे हैं। एक ऐसा सफर, जो सघर्षों से शुरू होकर विधायक तक पहुंचा और शुक्रवार को हमेशा के लिए थम गया। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद मे प्रदेश उपाध्यक्ष के पद से डॉ. श्याम विहारी लाल ने राजनीति की शुरुआत की थी।
बरेली से कपिल यादव
