*शिक्षक का कुशीनगर से उसके गृहजनपद गाजीपुर स्थानांतरण के बाद विदाई में ग्रामीणों के रोने का वीडियो वायरल
कुशीनगर- जिले से सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें स्कूल के बच्चे रो रहे हैं, ग्रामीण भी एक व्यक्ति से लिपट कर रोते हुए दिखाई दे रहे हैं। वायरल वीडियो में बताया गया हैं, कुशीनगर जनपद के दुदही ब्लॉक में स्थित एक परिषदीय विद्यालय में कार्यरत एक अध्यापक के विदाई के समय का है । जिसमें इस अध्यापक के विदाई के दौरान छात्रों के अलावा उनके अभिभावक भी रो पड़े हैं। उस वीडियो को लोग पोस्ट करते हुए गुरु शिष्य के प्रेम की बाते और सकारात्मक प्रतिक्रिया दी जा रही हैं।
विदाई समारोह में रोये बच्चो के साथ स्टाफ और अभिभावक
दरअसल, कुशीनगर जनपद के दुदही विकासखंड अंतर्गत ग्राम सभा पाण्डेयपट्टी में विगत 6 वर्षों से शिक्षक पद पर कार्यरत गाजीपुर गृहजनपद के निवासी मान्धाता सिंह यादव प्रधानाध्यापक के रूप में सेवाएं दे रहे थे। इस बीच इनका स्थानांतरण उनके गृहजनपद में हो गया है। जिसके बाद विद्यालय परिसर में स्टाफ ने बीते सोमवार को विदाई समारोह का आयोजन किया। विदाई में बच्चो के साथ उनके अभिभावकों ने हिस्सा लिया। शिक्षक मान्धाता सिंह के विदाई समारोह में छात्र फूट-फूट कर रोने लगे, सिर्फ इतना ही नहीं अध्यापक मान्धाता के विदाई पर बच्चों के अभिभावक भी उनसे लिपटकर रो पड़े ।
मान्धाता सिंह के चुनौतियों, कर्तव्यों और लोकप्रियता की कहानी
शिक्षक मान्धाता सिंह उत्तरप्रदेश के गाजीपुर जिले में किसी प्राइवेट विद्यालय में शिक्षक थे। मान्धाता सिंह का 11 साल पहले बतौर सरकारी शिक्षक कुशीनगर जिले के दुदही ब्लाक के रामपुर जमुनिया में बतौर शिक्षक हुई। कुछ साल बाद इनका समायोजन ( पदौन्नति) करके कन्याविद्यालय दुदही पोस्टिंग हो गयी जहाँ लोगो ने सम्मान भी किया । जनवरी 2014 में प्रधनाचार्य के पद पर विशुनपुरा में उनको नियुक्ति हुई, एक महीने बाद प्रधानाध्यापक के पद पर फरवरी 2014 में दुदही ब्लाक के पाण्डेयपट्टी में हुई । हमसे बात करते हुए मान्धाता सिंह ने बताया – ” जब मै इस विद्यालय पहुचा तो स्कूल की हालत देखकर मुझे काफी दुःख हुआ। लगभग 100 से ज्यादा बच्चो के नामांकन थे पर बच्चों की उपस्थिति बिल्कुल कम थी मैंने उसे बदलने का निश्चय किया और अपने सहायक अध्यापको के सहयोग से लोगो के साथ बैठक करनी शुरू की, लोगो ने पहले मजाक बनाये जिससे हमारे सहयोगी निराश हुए। मैं घर से दूर था और अधिक समय विद्यालय में देता और पूरा स्टाफ भी मदद किये जिससे रोज आने वाले बच्चों में सुधार हुआ । धीरे-धीरे हम लोगो ने अभिभावकों में विश्वास जगाने में कामयाब हुए और वे अपने बच्चों को प्राइवेट विद्यालय से निकाल परिषदीय विद्यालय में दाखिला कराये । बच्चों की संख्या 200 के पार हो गयी । अभिभावकों और बच्चो से एक अपनेपन का एहसास होने लगा । ग्रामप्रधान का कुछ खास सहयोग न होने से बहुत दिक्कत हुई , प्रधान द्वारा निराधार शिकायत भी की गई पर अभिभावकों एंंव बच्चो ने हमारा भरपूर साथ दिया । विदाई के दिन जब हमें वहा से निकलना था तो बहुत दुःख हुआ क्योकि वे बच्चे हमारे भगवान जैसे थे और गाँव परिवार जैसा था।”
शिक्षक मान्धाता सिंह के लिए बच्चे और स्टाफ क्या कहते हैं?
सहायक अध्यापक आलोक पाण्डेय कहते है कि -“उनका स्वभाव बिल्कुल सरल था और उनके नेतृत्व में काम करना अच्छा लगता था, बच्चे भी मन लगाकर पढ़ते वही कभी किसी तरह का उनके मन मे तनाव या मनमुटाव नही रहता।” एक छात्र ने बताया कि – “सर बहुत मस्त पढ़ाते थे और अगर कभी किसी के पास पेन या कॉपी नही रहती तो उन्हें खुद लेकर दे देते और हम सभी से बहुत प्यार करते थे।” शिक्षामित्र प्रभु कहते हैं- “बच्चो और हम स्टाफ के साथ-साथ अभिभावकों से उनके व्यवहार और सम्मान के कारण आत्मिक लगाव हो गया था, हमने कभी अंतर नही समझे और भाई की तरह मानते यही कारण है कि उनके स्थानांतरण के विदाई समारोह में सभी भावुक हो गए।”
बेटी की विदाई जैसा दर्द दे रही थी विदाई समारोह
गाव के उदयभान बताते है कि – “उनकी बच्चो के प्रति लगाव और लगन के कारण अपनेपन का एहसास होता था, जब उनकी विदाई की गई तो लगा मानो कोई अनमोल चीज हमसे दूर जा रही है जैसे हम बेटी की विदाई कर रहे ।” गयासुद्दीन कहते है – “हर बच्चे और अभिभावकों में सद्भावना बनाये रखना और बच्चों की पढ़ाई एंव उनकी भोजन व जरूरत की चिंता ने एक लगाव उत्तपन्न किया और सभी उनके जाने पर रोने लगे।” गाँव की एक बुजुर्ग महिला ये कहते हुए भावुक हो गयी कि – ” यादव सर के जाने का बहुत दु:ख है, उनके जाने के बाद एक बेचैनी सी महसूस हो रही और जबतक वे शकुशल अपने घर नही पहुच जाते चिंता बनी रहेगी।”
मान्धाता सिंह का अन्य शिक्षकों को दिया ये सन्देश
शिक्षक मान्धाता सिंह से जब हमने शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षकों की अधिकांश जगह से मिलने वाली शिकायत और लापरवाही की खबरों के बीच लोकप्रिय होने कारण पूछा तो उन्होने सभी शिक्षकों को एक सन्देश देते हुए कहा -” सभी शिक्षकों को ज़रूरी है कि अपने कर्तव्यों का पालन सही से करे ताकि अभिभावकों का विश्वास जीता जा सके जिससे इस कम्पटीशन के समय मे हम बच्चों को काबिल बना सके और सबके दिल मे जगह।”
शिक्षक के लिए ऐसी लोकप्रियता पुरस्कार से कम नही
इसके बाद यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि अध्यापक मान्धाता सिंह ने गुरु और शिष्य के इस परंपरा को किस प्रकार चुनौती और परेशानी को लगन, मेहनत एव ईमानदारी से किया होगा कि उनकी विदाई ने सब को रोने पर मजबूर कर दिया। शिक्षा में वातावरण का अत्यधिक महत्व कहा गया हैं और जिस प्रकार मान्धाता सिंह ने प्राथमिक पाठशाला पाण्डेयपट्टी में शिक्षा का माहौल बनाया अगर इनका अनुशरण प्रदेश के अन्य अध्यापक करें तो निश्चित ही देश और प्रदेश की शिक्षा के स्तर में काफी प्रभाव पड़ेगा।।
– कुशीनगर से अनूप यादव
