विवाहेत्तर संबंधों की गूढ़ता पर आधारित नाटक “दूसरा आदमी दूसरी औरत” का हुआ मंचन

बरेली। थिएटर अड्डा पर रंगालय एकेडेमी ऑफ आर्ट एंड कल्चर द्वारा आयोजित तृतीय 15 दिवसीय थिएटर फेस्टिवल के ग्यारवें दिन का माहौल बेहद उत्साहित और संजीदा रहा। इस विशेष शाम का आकर्षण था युगांधर थिएटर द्वारा प्रस्तुत नाटक “दूसरा आदमी दूसरी औरत”। नाटक का लेखन विभा रानी ने किया है और इसके निर्देशन की जिम्मेदारी सुशील कुमार ने संभाली थी। इस नाटक ने विवाहेत्तर संबंधों के संवेदनशील विषय को बेहद गहराई और ईमानदारी से मंच पर उकेरा।

नाटक में दिखाया गया कि किस तरह इंसान के जीवन में अकेलापन धीरे-धीरे उसकी सोच और भावनाओं पर हावी हो जाता है। जब जीवन में कोई भावनात्मक साथी नहीं होता, तो इंसान नीरसता और खोखलेपन से उबरने के लिए सम्बंधों की तलाश करता है। यह नाटक विवाहेत्तर संबंधों को सही या गलत ठहराने का प्रयास नहीं करता, बल्कि उन हालातों और भावनाओं को सामने लाता है जिसमें लोग ऐसे संबंधों की ओर बढ़ जाते हैं। प्रस्तुति के दौरान कलाकारों ने दिखाया कि सही और गलत का फैसला समाज या व्यक्ति के हाथों में नहीं होता, बल्कि परिस्थितियां ही इंसान को आगे बढ़ने पर मजबूर करती हैं। इंसान केवल समय के हाथों की कठपुतली बन जाता है, वहीं हालात उसे अपनी सोच और फैसले बदलने के लिए मजबूर कर देते हैं।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई जिसमें डॉ. विनोद पागरानी, शेरगढ़ ब्लॉक प्रमुख भूपेंद्र कुर्मी और मीरगंज ब्लॉक प्रमुख गोपाल गंगवार ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। रंग मंच की इस प्रस्तुति ने दर्शकों को न केवल मनोरंजन किया बल्कि संबंधों, अकेलेपन और मानवीय कमजोरियों पर सोचने के लिए मजबूर भी किया। दर्शकों ने कलाकारों की अभिनय क्षमता और विषय की गंभीरता को खूब सराहा।

फेस्टिवल की आगामी कड़ी में कल समन्वय सांस्कृतिक समिति रामनगर (उत्तराखंड) द्वारा नाटक “लाख की नाक” का मंचन किया जाएगा।

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