बरेली। कोरोना काल में रेलवे प्लेटफार्म पर जाने से पहले प्रवेश द्वार पर लगाई गई हैंडवाश मशीनें शोपीस बनकर रह गई है। जिसे रेल यात्रियों को बगैर हाथ सैनिटाइज करें। ट्रेन में यात्रा करने को मजबूर होना पड़ रहा है। कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जंक्शन के प्रवेश द्वार पर 85 हजार रुपए की लागत से हैंडवाश मशीनें लगवाई गई थी। जो दो माह सुचारू रूप से काम करने के बाद शोपीस बनकर रह गई है। जिससे अब ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों को बगैर हाथ सैनिटाइज किए यात्रा करना पड़ रहा है। जिससे कोरोना के संक्रमण के फैलने की समस्या बनी रहती है वही रेल अधिकारियों का कहना है कि ऐसे हैंड वॉश मशीन से क्या फायदा जो लगने के बाद तीन माह तक सुचारू रूप से काम नहीं कर पाई। मशीन खराब होने से रेल यात्रियों को बगैर हाथ सैनिटाइज की ट्रेनों में सफर करना पड़ रहा है। जंक्शन पर सफाई का काम करने वाले हीरालाल का कहना है कि कोरोना काल में स्टेशन पर प्रतिदिन सैनिटाइज होता था। अब 15 से 20 दिन में एक बार ही हो रहा है। माना जाए कि महीने में केवल दो बार परिसर को सैनिटाइज किया जा रहा है। रेल अधिकारी ने अपना नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि आनन-फानन में रेलवे के अधिकारियों द्वारा जंक्शन के प्रवेश द्वार पर दो वासवेशन व एक सैनिटाइजर की शीशी केवल 25 दिन ही रखी गई। जिसके बाद से सैनिटाइजर की शीशी नहीं लगाई गई। हैंड वॉश की जगह केवल टंकी का पानी रह गया। जिसका पाइप फटने से वॉश वेशन में पानी आना बंद हो गया जिससे बाँस वेशन पूरी तरह शोपीस बन गए है। प्लेटफार्म एक पर रखी हैंड सेनीटाइजर मशीन का ऊपरी हिस्सा पूरी तरह गल चुका है लेकिन उन्हें शो पीस बना कर छोड़ दिया गया है। जंक्शन से इस समय मात्र तीन सुपरफास्ट ट्रेन गुजर रही हैं। जिससे जंक्शन पर उतरने बाद चढ़ने वालों की संख्या एक दर्जन से अधिक नहीं हो पाती।
कोरोना संक्रमण के चलते स्टेशन के प्रवेश द्वार पर यात्रियों को हैंड वॉश करने के लिए 85 हजार रुपए की लागत से दो हैंड वॉश मशीन लगवाई गई थी। जिन्हें यात्रियों द्वारा गलत ढंग से प्रवेश प्रयोग करके बेकार कर दिया गया है। इनकी जगह नई हैंड वॉश मशीन लगाई जाएगी।।
सत्यवीर सिंह, स्टेशन अधीक्षक बरेली
बरेली से कपिल यादव
