बरेली। ऑनलाइन साइबर ठगी कर रुपये को बैंक व बोगस फर्मों के जरिए खपाने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने बुधवार को पुलिस लाइन मे पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि गिरोह के चार सदस्यों को भुता पुलिस ने केसरपुर साप्ताहिक बाजार के पास से गिरफ्तार किया है जो लंबे समय से लोगों को अपने जाल में फंसा रहे थे। पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। उनके पास से 54 हजार, सात मोबाइल-टैबलेट, कई बैंकों के एटीएम-डेबिट कार्ड और बोगस फर्मों का जाली बिल मिला है। पूछताछ मे पता चला है कि गिरोह का नेटवर्क दिल्ली-नोएडा से लेकर जयपुर तक फैला है। एसपी साऊथ अंशिका वर्मा ने बताया कि पुलिस को साइबर ठगी के रुपये बैंक खातों मे जमा कर उसे खपाने वाले गिरोह के बारे मे इनपुट मिला था। यह गिरोह खुद को नामी बीमा कंपनियों का एजेंट बता लोगों की पूरी हो रही पालिसी पर अच्छा मुनाफा देने का लालच देकर ठगी करता था। पुलिस ने पड़ताल शुरू की तो गिरोह का पर्दाफाश हुआ। पुलिस को सूचना मिली थी कि केसरपुर साप्ताहिक बाजार के पास एक कार मे गिरोह के लोग बैठे हैं। सूचना पर उप निरीक्षक वीकेश कुमार के नेतृत्व मे पुलिस टीम ने दोपहर करीब 1:15 बजे मौके पर छापा मारा और कार मे सवार चारों को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों में मो. नबी, मो. अकरम और आरिफ भुता के केसरपुर के रहने वाले है। चौथा आरोपी फरमान फतेहगंज पश्चिमी के धंतियां गांव का रहने वाला है। आरोपियों के खिलाफ भुता थाने मे रिपोर्ट दर्ज करके कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। तलाशी के दौरान आरोपियों के पास से नूरी गारमेंट्स और रहमानी इंटरनेशनल के नाम की चालान स्लिप मिली है। जिनमें कोड भाषा मे पैसों का विवरण लिखा हुआ था। पुलिस के अनुसार ये ठग फर्जी कंपनियां बनाकर उनके नाम पर फर्जी बिलों के जरिए रुपयों का हेर-फेर करते थे। गिरोह ठगी की रकम को फर्जी तरीके से खुलवाए गए बैंक खातों में ट्रांसफर करता था। पूछताछ मे पता चला है कि नबी का बॉस तरुण कौशिक नामक शख्स है जो दिल्ली का रहने वाला है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। गिरोह की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपियों की पृष्ठभूमि खंगाली तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। पता चला है कि मो. नबी 2022 तक दिल्ली के अफजाल नामक शख्स के साथ साइबर ठगी के काले कारोबार में शामिल था। अफजाल का लिंक दुबई से जुड़ा है। उसने दुबई में भी आफिस खोल रखा है। मो. नबी ने उसके साथ करीब छह माह काम किया और 35 लाख रुपये कमाए। उसके बाद उसने तरुण कौशिक के साथ साइबर ठगी शुरू की। जांच मे भुता के रहने वाले ताहिर का नाम भी सामने आया है। ताहिर इस गिरोह को बैंक खाते मुहैया कराता था। हर खाते के लिए वह 18 हजार रुपये कमीशन लेता था। बैक खाता धारक के आधार कार्ड का पता तक बदलवा देता था। जिससे पुलिस खाताधारक तक नही पहुंच सके।।
बरेली से कपिल यादव
