बरेली। रूस और यूक्रेन के युद्ध के बीच यूक्रेन में फंसे छात्रों मे बरेली के कई छात्र भी शामिल है। बुधवार को यूक्रेन से दो और भाई बहन बरेली पहुंचे। बच्चों की सकुशल वतन वापसी के बाद अब पूरे घर मे जश्न का माहौल है और हो भी क्यों न आज सुरक्षित वतन लौटे बेटे सिमाल खान का बर्थडे जो था। परिजनों का कहना है कि उनका बेटा किस्मतवाला है जो बर्थडे के दिन घर पहुंच गया। भाई बहन के घर पहुंचने के बाद पूरे मोहल्ले में जश्न का माहौल था। परिजनों अब सिमाल का बर्थडे पूरे जश्न के साथ मनाने की तैयारी कर रहे है। उन्होंने अपना दर्द बयां किया कि किस तरह से वह यहां तक पहुंचे है। उन्होंने बताया कि जब कॉलेज के पास बम धमाके होते थे तो उनका दिल दहल जाता था। घर आने के लिए भी उन्हें कई किलोमीटर तक पैदल चढ़ना पड़ा तो वहीं, 12 से 14 घंटों तक यूं ही खड़े रहना पड़ा। किसी तरह बमुश्किल वह आज अपने घर पहुंचे है। आपको बता दें कि थाना किला क्षेत्र रहने वाले खान इकबाल और फराह नगरिस का बेटा सिमाल खां और बेटी तस्बीहा यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे थे। दोनों ही भाई बहन यूवानों फ्रेंकिस नेशनल मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र-छात्रा थे। छात्रों ने बताया कि वह यूक्रेन में पिछले 6 दिन से फंसे थे। किसी तरह से वह रोमानिया बार्डर तक पहुंचे। जहां से उन्हें भारत की बस मिली और फिर वह अपने वतन वापस आए। दोनों ने बताया कि यूक्रेन में भारतीय छात्रों के हालात बहुत खराब है। यूक्रेन की सेना भारतीय छात्र-छात्राओं से बदसलूकी और धक्का मुक्की करती है। इतना ही नही आरोप तो यह भी है कि यूक्रेन की सेना छात्रों को वहीं पर रखना चाहती है जिससे रशिया भारतीय छात्रों के फंसे होने की वजह से वहां पर हमलों को रोक दे। उन्होंने आगे बताया कि जब भी कॉलेज के आस-पास धमाके होते तो वह सभी कांप उठते। किसी तरह से उन्होंने वहां पर छिपकर 3-4 दिन बिताए। छात्रों की माने तो यूक्रेन के हालात इस समय इतने खराब हैं कि वहां पर खाने से लेकर पानी तक के लिए मारामारी हो रही है। बहरहाल वह किसी तरह से कई किलोमीटर का पैदल सफर तय कर आज वापस बरेली पहुंच सके है। अब सिमाल और तस्बीहा अपने परिवार से मिलकर बेहद खुश है।।
बरेली से कपिल यादव
